आज मैं बताऊंगा दोस्तों कैसे दीदी की कोरी चूचियों को चूसा और खड़े खड़े दीदी को चोदा, मैंने अपनी दीदी को चोदा, कैसे दीदी को नंगा करके दीदी की बोबे चूसा, कैसे दीदी की कोरी चूत चाटी, कैसे दीदी को घोड़ी बना के ठोका, कैसे 9 इंच मोटा लण्ड से बड़ी दीदी की गांड मारी । मेरी बड़ी दीदी का नाम अनन्या है और उसकी उमर क़रीब २६ साल है दीदी मुझसे ६ साल बड़ी हैं हम लोग एक मिडल-कलास फमिली है और एक छोटे से फ्लैट मे मुंबई मे रहते हैं.हमारा घर मे एक छोटा सा हाल डिनिंग रूम दो बेडरूम और एक किचन है बाथरूम एक ही था और उसको सभी लोग इस्तेमाल करते थे. हमारे पिताजी और माँ दोनो नौकरी करते हैं दीदी मुझको चंदू कह कर पुकारती हैं और मै उनको दीदी कहा कर पुकारता हूँ. शुरू शुरू मे मुझे सेक्स के बारे कुछ नही मालूम था क्योंकि मै हाई सकूल मे पढ़ता था और हमारे बिल्डिंग मे भी अच्छी मेरे उमर की कोई लड़की नही थी. इसलिए मैने अभी तक सेक्स का मज़ा नही लिया था और ना ही मैने अब तक कोई नंगी लड़की देखी थी. हाँ मै कभी कभी पॉर्न मैगजीन मे नंगी तसबीर देख लिया करता था. जब मै चौदह साल का हुआ तो मुझे लड़किओं के तरफ़ और सेक्स के लिए इंटेरेस्ट होना शुरू हुआ. मेरे नज़रों के आसपास अगर कोई लड़की थी तो वो अनन्या दीदी ही थी. दीदी की लंबाई क़रीब क़रीब मेरे तरह ही थी, उनका रंग बहुत गोरा था और उनका चेहरा और बोडी स्ट्रक्चर हिंदी सिनेमा के जीनत अमान जैसा था. हाँ दीदी की चुन्ची जीनत अमान जैसे बड़ी बड़ी नही थी. मुझे अभी तक याद है की मै अपना पहला मुठ मेरी दीदी के लिए ही मारा था. आप ये कहानी आप मस्ताराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है। एक सन्डे सुबह सुबह जैसे ही मेरी दीदी बाथरूम से निकली मै बाथरूम मे घुस गया. मै बाथरूम का दरवाज़ा बंद किया और अपने कपड़े खोलना शुरू किया. मुझे जोरो की पिशाब लगी थी.

पिशाब करने के बाद मै अपने लंड से खेलने लगा. एका एक मेरी नज़र बाथरूम के किनारे दीदी के उतरे हुए कपड़े पर पड़ी. वहां पर दीदी अपनी नाइटगाऊन उतार कर छोड़ गयी थी. जैसे ही मैने दीदी की नाइटगाऊन उठाया तो देखा की नाइटगाऊन के नीचे दीदी की ब्रा पडा हुआ था. जैसे ही मै दीदी का काले रंग का ब्रा उठाया तो मेरा लंड अपने आप खडा होने लगा. मै दीदी के नाइटगाऊन उठाया तो उसमे से दीदी के नीले रंग का पैँटी भी गिर कर नीचे गिर गया. मैने पैँटी भी उठा लिया. अब मेरे एक हाथ मे दीदी की पैँटी थी और दूसरे हाथ मे दीदी के ब्रा था.ओह भगवान दीदी के अन्दर वाले कपड़े चूमे से ही कितना मज़ा आ रहा है यह वोही ब्रा हैं जो की कुछ देर पहले दीदी के चुन्चिओं को जकड रखा था और यह वोही पैँटी हैं जो की कुछ देर पहले तक दीदी की चूत से लिपटा था. यह सोच सोच करके मै हैरान हो रहा था और अंदर ही अंदर गरमा रहा था. मै सोच नही पा रहा था की मै दीदी के ब्रा और पैँटी को ले कर क्या करूँ.

 मै दीदी की ब्रा और पैँटी को ले कर हर तरफ़ से छुआ, सूंघा, चाटा और पता नही क्या क्या किया. मैने उन कपड़ों को अपने लंड पर मला. ब्रा को अपने छाती पर रखा. मै अपने खड़े लंड के ऊपर दीदी की पैँटी को पहना और वो लंड के ऊपर तना हुआ था. आप ये कहानी मस्ताराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है। फिर बाद मे मैं दीदी की नाइटगाऊन को बाथरूम के दीवार के पास एक हैंगर पर टांग दिया.

फिर कपड़े टांगने वाला पिन लेकर ब्रा को नाइटगाऊन के ऊपरी भाग मे फँसा दिया और पैँटी को नाइटगाऊन के कमर के पास फँसा दिया. अब ऐसा लग रहा था की दीदी बाथरूम मे दीवार के सहारे ख़ड़ी हैं और मुझे अपनी ब्रा और पैँटी दिखा रही हैं मै झट जा कर दीदी के नाइटगाऊन से चिपक गया और उनकी ब्रा को चूसने लगा और hindi sex story मन ही मन सोचने लगा की मैं दीदी की चुंची चूस रहा हूँ. मै अपना लंड को दीदी के पैँटी पर रगड़ने लगा और सोचने लगा की मै दीदी को चोद रहा हूँ. मै इतना गरम हो गया था की मेरा लंड फूल कर पूरा का पूरा टनना गया था और थोड़ी देर के बाद मेरे लंड ने पानी छोड़ दिया और मै झड़ गया. मेरे लंड ने पहली बार अपना पानी छोड़ा था और मेरे पानी से दीदी की पैँटी और नाइटगाऊन भीग गया था. मुझे पता नही की मेरे लंड ने कितना वीरज़ निकाला था लेकिन जो कुछ निकला था वो मेरे दीदी के नाम पर निकला था.मेरा पहले पहले बार झड़ना इतना तेज़ था की मेरे पैर जवाब दे दिया और मै पैरों पर ख़ड़ा नही हो पा रहा था और मै चुप चाप बाथरूम के फ़र्श पर बैठ गया. थॉरी देर के बाद मुझे होश आया और मै उठ कर नहाने लगा. शोवेर के नीचे नहा कर मुझे कुछ ताज़गी महसूस हुआ और मै फ़्रेश हो गया. आप ये कहानी आप मस्ताराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है।नहाने बाद मै दीवार से दीदी की नाइटगाऊन, ब्रा और पैँटी उतारा और उसमे से अपना वीरज़ धो कर साफ़ किया और नीचे रख दिया. उस दिन के बाद से मेरा यह मुठ मरने का तरीक़ा मेरा सबसे फ़ेवरेट हो गया.

हाँ, मुझे इस तरह से मै मरने का मौक़ा सिर्फ़ इतवार को ही मिलता था. क्योंकि, इतवार के दिन ही मै दीदी के नहाने के बाद नहाता था. इतवार के दिन चुप चाप अपने बिस्तर पर पड़ा देखा करता था की कब दीदी बाथरूम मे घुसे और दीदी के बाथरूम मे घुसते ही मै उठ जाया करता था और जब दीदी बाथरूम से निकलती तो मै बाथरूम मे घुस जाया करता था.

मेरे मां और पिताजी सुबह सुबह उठ जाया करते थे और जब मै उठता था तो मां रसोई के नाश्ता बनाती होती और पिताजी बाहर बाल्कोनी मे बैठ कर अख़बार पढते होते या बाज़ार गये होते कुछ ना कुछ समान ख़रीदने. इतवार को छोड़ कर मै जब भी मै मारता तो तब यही सोचता कि मै अपना लंड दीदी की रस भरी चूत मे पेल रहा हूँ. शुरू शुरू मे मै यह सोचता था की दीदी जब नंगी होंगी तो कैसा दिखेंगी? फिर मै यह सोचने लगा की दीदी की चूत चोदने मे कैसा लगेगा. मै कभी कभी सपने ने दीदी को नंगी करके चोदा था और जब मेरी आँख खुलती तो मेरा शॉर्ट भीगा हुआ होता था. मैने कभी भी अपना सोच और अपना सपने के बारे मे किसी को भी नही बताया था और न ही दीदी को भी इसके बारे मे जानने दिया. मै अपनी स्कूल की पढाई ख़तम करके कालेज जाने लगा.

आप ये कहानी मस्ताराम डॉट नेटपर पढ़ रहे है। कॉलेज में मेरी कुछ गर्ल फ़रेंड भी हो गयी। उन गर्ल फ़रेंड मे से मैने दो चार के साथ सेक्स का मज़ा भी लिया. मै sex story in hindi जब कोई गर्ल फ़रेंड के साथ चुदाई करता तो मै उसको अपने दीदी के साथ कम्पेयर करता और मुझे कोई भी गर्ल फ़रेंड दीदी के बराबर नही लगती. मै बार बार यह कोशिश करता था मेरा दिमाग़ दीदी पर से हट जाए, लेकिन मेरा दिमाग़ घूम फिर कर दीदी पर ही आ जाता. मै हूमेशा 24 घंटे दीदी के बारे मे और उसको चोदनेके बारे मे ही सोचता रहता.

मै जब भी घर पर होता तो दीदी तो ही देखता रहता, लेकिन इसकी जानकारी दीदी की नही थी. दीदी जब भी अपने कपड़े बदलती थी या मां के साथ घर के काम मे हाथ बटाती थी तो मै चुपके चुपके उन्हे देखा करता था और कभी कभी मुझे दीदी की सुडोल चुची देखने को मिल जाती (ब्लाउज़ के ऊपर से) थी. दीदी के साथ अपने छोटे से घर मे रहने से मुझे कभी कभी बहुत फ़ायदा हुआ करता था. कभी मेरा हाथ उनके शरीर से टकरा जाता था. मै दीदी के दो भरे भरे चुची और गोल गोल चूतड़ों को छूने के लिए मरा जा रहा था.मेरा सबसे अच्छा पास टाइम था अपने बालकोनी मे खड़े हो कर सड़क पर देखना और जब दीदी पास होती तो धीरे धीरे उनकी चुचियों को छूना. आप ये कहानी आप मस्ताराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है।हमारे घर की बाल्कोनी कुछ ऐसी थी की उसकी लम्बाई घर के सामने गली के बराबर मे था और उसकी संकरी सी चौड़ाई के सहारे खड़े हो कर हम सड़क देख सकते थे. मै जब भी बालकोनी पर खड़े होकर सड़क को देखता तो अपने हाथों को अपने सीने पर मोड़ कर बालकोनी की रेल्लिंग के सहारे ख़ड़ा रहता था.

कभी कभी दीदी आती तो मै थोड़ा हट कर दीदी के लिए जगह बना देता और दीदी आकर अपने बगल ख़ड़ी हो जाती. मै ऐसे घूम कर ख़ड़ा होता की दीदी को बिलकुल सट कर खड़ा होना पड़ता. दीदी की भारी भारी चुन्ची मेरे सीने से सट जाता था. मेरे हाथों की उंगलियाँ, जो की बाल्कोनी के रेल्लिंग के सहारे रहती वे दीदी के चूचियों से छु जाती थी.

मै अपने उंगलियों को धीरे धीरे दीदी की चूचियों पर हल्के हल्के चलत था और दीदी को यह बात नही मालूम था. मै उंगलीओं से दीदी की चुन्ची को छू कर देखा की दीदी की चुनची कितना नरम और मुआयम है लेकिन फिर भी तनी तनी रहा करती हैं कभी कभी मै दीदी के चूतड़ों को भी धीरे धीरे अपने हाथों से छूता था. मै हमेशा ही दीदी की सेक्सी शरीर को इसी तरह से छू्ता था.मै समझता था की दीदी मेरे हाक्तों और मेरे इरादो से अनजान हैं दीदी इस बात का पता भी नही था की उनका छोटा भाई दीदी की नंगे शरीर को चाहता है और उनकी नंगी शरीर से खेलना चाहता है लेकिन मै ग़लत था. फिर एक दीदी ने मुझे पकड़ लिया. उस दिन दीदी किचन मे जा कर अपने कपरे बदल रही थी. हाल और किचन के बीच का पर्दा थोड़ा खुला हुआ था. दीदी दूसरी तरफ़ देख रही थी और अपनी कुर्ता उतार रही थी और उसकी ब्रा मे छुपा हुआ चुची मेरे नज़रों के सामने था. फ़िर रोज़ के तरह मै टी वी देख रहा था और दीदी को भी कंखिओं से देख रहा था

दीदी ने तब एकाएक सामने वाले दीवार पर टंगा शीशे को देखा और मुझे आँखे फ़िरा फ़िरा कर घूरते हुए पाया. दीदी ने देखा की मै उनकी चूचियों को घूर रहा हूँ. फिर एकाएक मेरे और दीदी की आँखे मिरर मे टकरा गयी मै शर्मा गया और अपने आँखे टी वी तरफ़ कर लिया. मेरा दिल क्या धड़क रहा था. मै समझ गया की दीदी जान गयी हैं की मै दीदी की चूचियों को घूर रहा था. अब दीदी क्या करेंगी? क्या दीदी मां और पिताजी को बता देंगी? क्या दीदी मुझसे नाराज़ होंगी? इसी तरह से हज़ारों प्रश्ना मेरे दिमाग़ मे घूम रहा था. मै दीदी के तरफ़ फिर से देखने का साहस जुटा नही पाया. उस दिन सारा दिन और उसके बाद 2-3 दीनो तक मै दीदी से दूर रहा, उनके तरफ़ नही देखा. इन 2-3 दीनो मे कुछ नही हुआ. मै ख़ुश हो गया और दीदी को फिर से घुरना चालू कर दिया. दीदी मे मुझे 2-3 बार फिर घुरते हुए पकड़ लिया, लेकिन फिर भी कुछ नही बोली. मै समझ गया की दीदी को मालूम हो चुका है मै क्या चाहता हूँ ।

ख़ैर जब तक दीदी को कोई एतराज़ नही तो मुझे क्या लेना देना और मै मज़े से दीदी को घुरने लगा.एक दिन मै और दीदी अपने घर के बालकोनी मे पहले जैसे खड़े थे. दीदी मेरे हाथों से सट कर ख़ड़ी थी और मै अपने उंगलीओं को दीदी के चुनची पर हल्के हल्के चला रहा था. मुझे लगा की दीदी को शायद यह बात नही मालूम की मै उनकी चूचियों पर अपनी उंगलीओं को चला रहा हूँ |

मुझे इस लिए लगा क्योंकी दीदी मुझसे फिर भी सट कर ख़ड़ी थी. लेकिन मै यह तो समझ रहा थी क्योंकी दीदी ने पहले भी नही टोका था, तो अब भी कुछ नही बोलेंगी और मै आराम से दीदी की चूचियों को छू सकता हूँ.हमलोग अपने बालकोनी मे खड़े थे और आपस मे बातें कर रहे थे, हमलोग कालेज और स्पोर्ट्स के बारे मे बाते कर रहे थे. हमारा बालकोनी के सामने एक गली था तो हमलोगों की बालकोनी मे कुछ अंधेरा था. बाते करते करते दीदी मेरे उंगलीओं को, जो उनकी चुनची पर घूम रहा था, अपने हाथों से पकड़कर अपने चुनची से हटा दिया. दीदी को अपने चुनची पर मेरे उंगली का एहसास हो गया था और वो थोड़ी देर के लिए बात करना बंद कर दिया और उनकी शरीर कुछ अकड़ गयी लेकिन, दीदी अपने जगह से हिली नही और मेरे हाथो से सट कर खड़ी रही. दीदी ने मुझे से कुछ नही बोली तो मेरा हिम्मत बढ गया और मै अपना पूरा का पूरा पंजा दीदी की एक मुलायम और गोल गोल चुनची पर रख दिया. मै बहुत डर रहा था. पता नही दीदी क्या बोलेंगी? मेरा पूरा का पूरा शरीर कांप रहा था. लेकिन दीदी कुछ नही बोली. दीदी सिर्फ़ एक बार मुझे देखी और फिर सड़क पर देखने लगी. मै भी दीदी की तरफ़ डर के मारे नही देख रहा था. मै भी सड़क पर देख रहा था और अपना हाथ से दीदी की एक चुनची को धीरे धीरे सहला रहा था.

मै पहले धीरे धीरे दीदी की एक चुनची को सहला रहा था और फिर थोड़ी देर के बाद दीदी की एक मुलायम गोल गोल, नरम लेकिन तनी चुनची को अपने हाथ से ज़ोर ज़ोर से मसलने लगा. दीदी की चुनची काफ़ी बड़ी थे और मेरे पंजे मे नही समा रही थी। थोड़ी देर बाद मुझे दीदी की कुर्ता और ब्रा के उपर से लगा दीदी की चुनची के निपपले तन गयी और मै समझ गया की मेरे चुनची मसलने से दीदी गरमा गयी हैं दीदी की कुर्ता और ब्रा के कपड़े बहुत ही महीन और मुलायम थी और उनके ऊपेर से मुझे दीदी की निपपले तनने के बाद दीदी की चुनची छूने से मुझे जैसे स्वर्ग मिल गया था. किसी जवान लड़की के चुनची छूने का मेरा यह पहला अवसर था.

मुझे पता ही नही चला की मै कब तक दीदी की चूचियों को मसलता रहा . और दीदी ने भी मुझे एक बार के लिए मना नही किया. दीदी चुपचाप ख़ड़ी हो कर मुझसे अपना चुनची मसलवाती रही. दीदी की चुनची मसलते मसलते मेरा लंड धीरे धीरे ख़ड़ा होने लगा था. मुझे बहुत मज़ा आ रहा था लेकिन एकाएक मां की आवाज़ सुनाई दी. मां की आवाज़ सुनते ही दीदी ने धीरे से मेरा हाथ अपने चुनची से हटा दिया और मां के पास चली गयी उस रात मै सो नही पाया, मै सारी रात दीदी की मुलायम मुलायम चुनची के बारे मे सोचता रहा.दूसरे दिन शाम को मै रोज़ की तरह अपने बालकोनी मे खड़ा था. आप ये कहानी मस्ताराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है।

थोड़ी देर के बाद दीदी बालकोनी मे आई और मेरे बगल मे ख़ड़ी हो गयी मै 2-3 मिनट तक चुपचाप ख़ड़ा दीदी की तरफ़ देखता रहा. दीदी ने मेरे तरफ़ देखी. मै धीरे से मुस्कुरा दिया, लेकिन दीदी नही मुस्कुराई और चुपचाप सड़क पर देखने लगी. मै दीदी से धीरे से बोला- छूना है, मै साफ़ साफ़ दीदी से कुछ नही कह पा रहा था. और पास आ दीदी ने पूछा – क्या छूना चाहते हो? साफ़ साफ़ दीदी ने फिर मुझसे पूछी. तब मै धीरे से दीदी से बोला, तुम्हारी दूध छूना दीदी ने तब मुझसे तपाक से बोली, क्या छूना है साफ़ साफ़ मै तब दीदी से मुस्कुरा कर बोला, तुम्हारी चुनची छूना है उनको मसलना है। अभी मां आ सकती है दीदी ने तब मुस्कुरा कर बोली. मै भी तब मुस्कुरा कर अपनी दीदी से बोला, जब मां आएगी हमें पता चल जायेगा मेरे बातों को सुन कर दीदी कुछ नही बोली और चुपचाप नज़दीक आ कर ख़ड़ी हो गयी, लेकिन उनकी चुनची कल की तरह मेरे हाथों से नही छू रहा था. मै समझ गया की दीदी आज मेरे से सट कर ख़ड़ी होने से कुछ शर्मा रही है अबतक दीदी अनजाने मे मुझसे सट कर ख़ड़ी होती थी. लेकिन आज जान बुझ कर मुझसे सात कर ख़ड़ी होने से वो शर्मा रही है क्योंकी आज दीदी को मालूम था की सट कर ख़ड़ी होने से क्या होगा. जैसे दीदी पास आ गयी और अपने हाथों से दीदी को और पास खीच लिया. अब दीदी की चुनची मेरे हाथों को कल की तरह छू रही थी.
मैने अपना हाथ दीदी की चुनची पर टिका दिया.

दीदी के चुनची छूने के साथ ही मै मानो स्वर्ग पर पहुँच गया. मै दीदी की चुनची को पहले धीरे धीरे छुआ, फिर उन्हे कस कस कर मसला. कल की तरह, आज भी दीदी का कुर्ता और उसके नीचे ब्रा बहुत महीन कपड़े का था, और उनमे से मुझे दीदी की निपपले तन कर खड़े होना मालूम चल रहा था. मै तब अपने एक उंगली और अंगूठे से दीदी की निपपले को ज़ोर ज़ोर से दबाने लगा. मै जितने बार दीदी की निपपले को दबा रहा था, उतने बार दीदी कसमसा रही थी और दीदी का मुँह शरम के मारे लाल हो रहा था.

तब दीदी ने मुझसे धीरे से बोली, धीरे दबा, लगता मै तब धीरे धीरे करने लगा. मै और दीदी ऐसे ही फाल्तू बातें कर रहे थे और देखने वाले को एही दिखता की मै और दीदी कुछ गंभीर बातों पर बहस कर रहे रथे. लेकिन असल मे मै दीदी की चुचियोंको अपने हाथों से कभी धीरे धीरे और कभी ज़ोर ज़ोर से मसल रहा था. थोड़ी देर मां ने दीदी को बुला लिया और दीदी चली गयी ऐसे ही 2-3 दिन तक चलता रहा. मै रोज़ दीदी की सिर्फ़ एक चुनची को मसल पाता था. लेकिन असल मे मै दीदी को दोनो चुचियों को अपने दोनो हाथों से पाकर कर मसलना चाहता था. लेकिन बालकोनी मे खड़े हो कर यह मुमकिन नही था. मै दो दिन तक इसके बारे मे सोचता रहा.आप ये कहानी मस्ताराम डॉट नेट। पर पढ़ रहे है।

एक दिन शाम को मै हाल मे बैठ कर टी वी देख रहा था. मां और दीदी किचन मे डिनर की तैयारी कर रही थी. कुछ देर के बाद दीदी काम ख़तम करके हाल मे आ कर बिस्तर पर बैठ गयी दीदी ने थॉरी देर तक टी वी देखी और फिर अख़बार उठा कर पढने लगी. दीदी बिस्तर पर पालथी मार कर बैठी थी और अख़बार अपने सामने उठा कर पढ रही थी. मेरा पैर दीदी को छू रहा था. मैने अपना पैरों को और थोड़ा सा आगे खिसका दिया और और अब मेरा पैर दीदी की जांघो को छू रहा था. मै दीदी की पीठ को देख रहा था. दीदी आज एक काले रंग का झीना टी शर्ट पहने हुई थी और मुझे दीदी की काले रंग का ब्रा भी दिख रहा था. मै धीरे से अपना एक हाथ दीदी की पीठ पर रखा और टी शर्ट के उपर से दीदी की पीठ पर चलाने लगा. जैसे मेरा हाथ दीदी की पीठ को छुआ दीदी की शरीर अकड़ गया. दीदी ने तब दबी जवान से मुझसे पूछी, यह तुम क्या कर रहे हो तुम पागल तो नही हो गये मां अभी हम दोनो तो किचन से देख लेगी”, दीदी ने दबी जवान से फिर मुझसे बोली. “मा कैसे देख लेगी?” मैने दीदी से कहा. “क्या मतलब है तुम्हारा? दीदी ने पूछी. “मेरा मतलब यह है की तुम्हारे सामने अख़बार खुली हुई है अगर मां हमारी तरफ़ देखेगी तो उनको अख़बार दिखलाई देगी.” मैने दीदी से धीरे से कहा. “तू बहुत स्मार्ट और शैतान है दीदी ने धीरे से मुझसे बोली.फिर दीदी चुप हो गयी और अपने सामने अख़बार को फैला कर अख़बार पढने लगी.

मै भी चुपचाप अपना हाथ दीदी के दाहिने बगल के ऊपेर नीचे किया और फिर थोड़ा सा झुक कर मै अपना हाथ दीदी की दाहिने चुनची पर रख दिया. जैसे ही मै अपना हाथ दीदी के दाहिने चुनची पर रखा दीदी कांप गयी मै भी तब इत्मिनान से दीदी की दाहिने वाली चुनची अपने हाथ से मसलने लगा. थॉरी देर दाहिना चुनची मसलने के बाद मै अपना दूसरा हाथ से दीदी बाईं तरफ़ वाली चुनची पाकर लिया और दोनो हाथों से दीदी की दोनो चूचियों को एक साथ मसलने लगा. दीदी कुछ नही बोली और वो चुप चाप अपने सामने अख़बार फैलाए अख़बार पढ्ती रही. मै दीदी की टी शर्ट को पीछे से उठाने लगा. दीदी की टी शर्ट दीदी के चूतड़ों के नीचे दबी थी और इसलिए वो ऊपेर नही उठ रही थी. मै ज़ोर लगाया लेकिन कोई फ़ैदा नही हुआ. दीदी को मेरे दिमाग़ की बात पता चल गया. दीदी झुक कर के अपना चूतड़ को उठा दिया और मैने उनका टी शर्ट धीरे से उठा दिया. अब मै फिर से दीदी के पीठ पर अपना ऊपेर नीचे घूमना शुरू कर दिया और फिर अपना हाथ टी शर्ट के अंदर कर दिया. वो! क्या चिकना पीठ था दीदी का. मै धीरे धीरे दीदी की पीठ पर से उनका टी शर्ट पूरा का पूरा उठ दिया और दीदी की पीठ नंगी कर दिया. अब अपने हाथ को दीदी की पीठ पर ब्रा के ऊपेर घूमना शुरू किया. जैसे ही मैने ब्रा को छुआ दीदी कांपने लगी. फिर मै धीरे से अपने हाथ को ब्रा के सहारे सहारे बगल के नीचे से आगे की तरफ़ बढा दिया.

फिर मै दीदी की दोनो चुचियों को अपने हाथ मे पकड़ लिया और ज़ोर ज़ोर से दबाने लगा. दीदी की निपपले इस समय तनी तनी थी और मुझे उसे अपने उँगलेओं से दबाने मे मज़ा आ रहा था. मै तब आराम से दीदी की दोनो चूचियों को अपने हाथों से दबाने लगा और कभी कभी निपपले खिचने लगा. मा अभी भी किचन मे खाना पका रही थी.

हम लोगों को मां साफ़ साफ़ किचन मे काम करते दिखलाई दे रही थी. मै यह सोच सोच कर खुश हो रहा की दीदी कैसे मुझे अपनी चुचियों से खेलने दे रही है और वो भी तब जब मां घर मे मौजूद हैं। मै तब अपना एक हाथ फिर से दीदी के पीठ पर ब्रा के हूक तक ले आया और धीरे धीरे दीदी की ब्रा की हूक को खोलने लगा. दीदी की ब्रा बहुत टाईट थी और इसलिए ब्रा का हूक आसानी से नही खुल रहा था. लेकिन जब तक दीदी को यह पता चलता मै उनकी ब्रा की हूक खोल रहा हूँ, ब्रा की हूक खुल गया और ब्रा की स्ट्रप उनकी बगल तक पहुँच गया. दीदी अपना सर घुमा कर मुझसे कुछ कहने वाली थी की मां किचन मे से हाल मे आ गयी मै जल्दी से अपना हाथ खींच कर दीदी की टी शर्ट नीचे कर दिया और हाथ से टी शर्ट को ठीक कर दिया. मां हल मे आ कर कुछ ले रही थी और दीदी से बातें कर रही थी. दीदी भी बिना सर उठाए अपनी नज़र अख़बार पर रखते हुए मां से बाते कर रही थी।मां को हमारे कारनामो का पता नही चला और फिर से किचन मे चली गयी |

जब मां चली गयी तो दीदी ने दबी ज़बान से मुझसे बोली, सोनू, मेरी ब्रा की हूक को लगा “क्या? मै यह हूक नही लगा पाउंगा,” मै दीदी से बोला. “क्यों, तू हूक खोल सकता है और लगा नही सकता? दीदी मुझे झिड़कते हुए बोली. “नही, यह बात नही है दीदी. तुम्हारा ब्रा बहुत टाईट है !” मै फिर दीदी से कहा. दीदी अख़बार पढते हुए बोली, मुझे कुछ नही पता, तुमने ब्रा खोला है और अब तुम ही इसे लगाओगे.” दीदी नाराज़ होती बोली. “लेकिन दीदी, ब्रा की हूक को तुम भी तो लगा सकती हो?” मै दीदी से पूछा. ” बुधू, मै नही लगा सकता, मुझे हूक लगाने के लिए अपने हाथ पीछे करने पड़ेंगे और मां देख लेंगी तो उन्हे पता चल जाएगा की हम लोग क्या कर रहे थी, दीदी मुझसे बोली. मुझे कुछ समझ मे नही आ रहा था की मै क्या करूँ. मै अपना हाथ दीदी के टी शर्ट नीचे से दोनो बगल से बढा दिया और ब्रा के स्ट्रप को खीचने लगा. आप ये कहानी मस्ताराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है।

जब स्ट्रप थोड़ा आगे आया तो मैने हूक लगाने की कोशिश करने लगा. लेकिन ब्रा बहुत ही टाईट था और मुझसे हूक नही लग रहा था. मै बार बार कोशिश कर रहा था और बार बार मां की तरफ़ देख रहा था. मां ने रात का खाना क़रीब क़रीब पका लिया था और वो कभी भी किचन से आ सकती थी. दीदी मुझसे बोली, यह अख़बार पकड़. अब मुझे ही ब्रा के स्ट्रप को लगाना परेगा.” मै बगल से हाथ निकल कर दीदी के सामने अख़बार पाकर लिया और दीदी अपनी हाथ पीछे करके ब्रा की हूक को लगाने लगी |

मै पीछे से ब्रा का हूक लगाना देख रहा था. ब्रा इतनी टाईट थी की दीदी को भी हूक लगाने मे दिक्कत हो रही थी. आख़िर कर दीदी ने अपनी ब्रा की हूक को लगा लिया. जैसे ही दीदी ने ब्रा की हूक लगा कर अपने हाथ सामने किया मां कमरे मे फिर से आ गयी मां बिस्तर पर बैठ कर दीदी से बातें करने लगी. मै उठ कर टोइलेट की तरफ़ चल दिया, क्योंकी मेरा लंड बहुत गरम हो चुका था और मुझे उसे ठंडा करना था. दूसरे दिन जब मै और दीदी बालकोनी पर खड़े थे तो दीदी मुझसे बोली, हम कल रत क़रीब क़रीब पकड़ लिए गये थे |

मुझे बहुत शरम आ रही मुझे पता है और मै कल रात की बात से शर्मिंदा हूँ. तुम्हारी ब्रा इतना टाईट थी की मुझसे उसकी हूक नही लगा” मैने दीदी से कहा. दीदी तब मुझसे बोली, मुझे भी बहुत दिक्कत हो रही थी और मुझे अपने हाथ पीछे करके ब्रा की स्ट्रप लगाने मे बहुत शरम आ रही दीदी, तुम अपनी ब्रा रोज़ कैसे लगती मैने दीदी से धीरे से पूछा. दीदी बोली, हूमलोग फिर दीदी समझ गयी की मै दीदी से मज़ाक कर रहा हूँ तब बोली, तू बाद मे अपने आप समझ जाएगा. फिर मैने दीदी से धीरे से कहा, मै तुमसे एक बात कहूं? हाँ -दीदी तपाक से बोली. “दीदी तुम सामने हूक वाले ब्रा क्यों नही पहनती, मैने दीदी से पूछा. दीदी तब मुस्कुरा कर बोली, सामने हूक वाले ब्रा बहुत महंगी है। मै तपाक से दीदी से कहा, कोइ बात नही. तुम पैसे के लिए मत घबराओ, मै तुम्हे पैसे दे दूंगा ।

मेरे बातों को सुनकर दीदी मुस्कुराते हुए बोली, तेरे पास इतने सारे पैसे हैं चल मुझे एक 100 का नोट दे। मै भी अपना पर्स निकाल कर दीदी से बोला, तुम मुझसे 100 का नोट ले लो दीदी मेरे हाथ मे 100 का नोट देख कर बोली, नही, मुझे रुपया नही चाहिए. मै तो यूँही ही मज़ाक कर रही “लेकिन मै मज़ाक नही कर रहा हूँ. दीदी तुम ना मत करो और यह रुपये तुम मुझसे ले और मै ज़बरदस्ती दीदी के हाथ मे वो 100 का नोट थमा दिया. दीदी कुछ देर तक सोचती रही और वो नोट ले लिया और बोली, मै तुम्हे उदास नही देख सकती और मै यह रुपया ले रही हूँ।

लेकिन याद रखना सिर्फ़ इस बार ही रुपये ले रही हूँ. मै भी दीदी से बोला, सिर्फ़ काले रंग की ब्रा ख़रीदना. मुझे काले रंग की ब्रा बहुत पसंद है और एक बात याद रखना, काले रंग के ब्रा के साथ काले रंग की पैँटी भी ख़रीदना दीदी। दीदी शर्मा गयी और मुझे मारने के लिए दौड़ी लेकिन मै अंदर भाग गया.अगले दिन शाम को मै दीदी को अपने किसी सहेली के साथ फ़ोन पर बातें करते हुए सुना. मै सुना की दीदी अपने सहेली को मार्केटिंग करने के लिए साथ चलने के लिए बोल रही है। मै दीदी को अकेला पा कर बोला, मै भी तुम्हारे साथ मार्केटिंग करने के लिए जाना चाहता हूँ. आप ये कहानी आप मस्ताराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है।

क्या मै तुम्हारे साथ जा सकता हूं दीदी कुछ सोचती रही और फिर बोली, सोनू, मै अपनी सहेली से बात कर चुकी हूँ और वो शाम को घर पर आ रही है और फिर मैने मां से भी अभी नही कही है की मै शोपिन्ग के लिए जा रही हूं।

मै दीदी से कहा, तुम जा कर मां से बोलो की तुम मेरे साथ मार्केट जा रही हो और देखना मां तुम्हे जाने देंगी. फिर हम लोग बाहर से तुम्हारी सहेली को फ़ोने कर देंगे की मार्केटिंग का प्रोग्राम कँसेल हो गया है और उसे आने की ज़रूरत नही है ठीक है ना, “हाँ, यह बात मुझे भी ठीक लगती है मै जा कर मां से बात करती हूं और यह कह कर दीदी मां से बात करने अंदर चली गयी मां ने तुरंत दीदी को मेरे साथ मार्केट जाने के लिए हाँ कहा दी. उस दिन कपड़े की मार्केट मे बहुत भीड़ थी और मै ठीक दीदी के पीछे ख़ड़ा हुआ था और दीदी के चुतड़ मेरे जांघों से टकरा रहा था. मै दीदी के पीछे चल रहा था जिससे की दीदी को कोई धक्का ना मार दे |

हम जब भी कोई फूटपाथ के दुकान मे खड़े हो कर कपड़े देखते तो दी मुझसे चिपक कर ख़ड़ी होती उनकी चुनची और जांघे मुझसे छू रहा होता. अगर दीदी कोई दुकान पर कपड़े देखती तो मै भी उनसे सट कर ख़ड़ा होता और अपना लंड कपड़ों के ऊपेर से उनके चुतड़ से भिड़ा देता और कभी कभी मै उनके चूतड़ों को अपने हाथों से सहला देता. हम दोनो ऐसा कर रहे थे और बहाना मार्केट मे भीड़ का था. मुझे लगा की मेरे इन सब हरकतों दीदी कुछ समझ नही पा रही थी क्योंकी मार्केट मे बहुत भीड़ थी.

Write A Comment


Online porn video at mobile phone


xxx kahani papa hooliपति ने ग्रुप सेक्स करवायासेक्सी ओल्ड ऐज चाची नंगी हिंदी कहानियांhindi sex stories/chudayiki sex kahaniya. kamukta com. antarvasna com/tag/page 69-120-185-258-320tight chut me lauda storiessexy stories flat ki kimat hindimaa cod ki xxx khaniगैरमरद से चुदवाती हूं मैमम्मी की chut मारी दादा ने ऑनलाइन विडियो हिंदी Co.xxx kahani tadpa tadpa ke chodaमनीषा की चूदाई कहानी हिंदी मेंKuwari babe jabardasti ganbang chudai khanihot collage girl/nokarani/bus me hot ladki ki kahanibehenki xxxxxxxx hot video kahaniमां के काँख और चूत के बालdhdhi or batijha sex video HDhindi adlt storiमहारानी की चुदाई नोकर दारा सेक्स कहानीanti chudai stori hindisonniya. ke. xxnx fotusexykahaniwithpicturebhabi ne apni chut ka ras saas ko pilay abua kee bheed main chudae sex storyunkle say chuth ki sex kahaniपापा ने दादी को चोदाहिन्दी कहानी प्यार चोदद भाईvidwa भाभी ko rakal banaiya में हिंदी में सेक्स कहानीaurat ki chudai ki kahani aur Usi Ki Jawani aurat ki chudai ki kahani Usi Ki Jawanivirgin chto ke chdai videoJawan bhabhi ki jabardasti gusana sex videoमसतराम की कहानी जिसमे पडोसी गांव की चुदाई की कहानीsexbaba sex story with salidide hendi khane xxxगावरान चोदा चोदी कहानीsex beti ki beti ki cudai khaniससूराल मे पडोसी से चुदाई की कहानीbahi Casi ho video xxxconfufi ki ladki kocoda saxsi khaniमेरी कसि कसाइ चुतAntarvasna रिश्ते में च****parivaar me chudaiजीजाजी मेरे गड़बड़ करो मुझे मजा आरहा हैsexee auntee tren me motee kahaneechudae picहिंदी सेक्यसी काहानियासुमेर ने चूत चोदीinden sex kahanexx.chadi.khainepapa ban we chut ke gulam sexi stori2 hashtal anty sexibehan ko chodkar viryadan kiyasasu ma xxx satoreDurgesh ki chudai storyhinde sxe kahani affars ma auncalbhai ne andere me jhopdi me choda storybuwa bhateeje ki kahaaniसेक्सी videobabi bevr kichude inden सादी बालीम्यू हांडी sexi stote और सेक्स ke trkeदीदी को मम्मी ने प्रेग्नेंट करवाया चुदाई विडीओsoi hui mousi ko choda xxx videomummy aur didi ko ek sath choda antarvasnakamsin xxx kahaniIndia janwaro me cudhi xxx40-45 xxx sex kahanibus me chacha ki god me mazeblu film dekh kar maa nai bete sy chudwyaxxx bhabhi kahani hindi mgrupsexstoryhindiदीदी की चुदाई उसके ही ससुराल मेंNaanga parivaaro ki kahaniyaहिन्दी सेक्स बूरचोद कहानीxxx hindi kahani 11 saal ki bahan chodinambar one hinde kahani sixबसे बहन कीं चोदाई भाई kamsin xxx pehli kahani urdugurumastram sex.comxxx deavrani samuhik hindi kathanew.bhabi.ko.devr.ne.nahte.dekha.chupke.khani.sex.dot.com.antarvasna wife ke chakkar me maa ko chod dalaxxx vidi हिदि xxxvidiचूतो की हूकुमत चुदाई कहानीkamukta.comsex dost ke ma ki cudai hindi aadioChalo ab hm chalte h massages नींद में दीदी को चोदाहॉट हिन्दी सेक्सी स्टोरkahaniyan sexyमाँ बेटे बकवासbhai bhan boor chodei poto xxxxxxnaukrani ko choda gav se sahar le ja kebhgkar xxx