मेरा नाम रमेश है और मेरी उम्र २८ वर्ष है। मेरा कद ५ फीट ७ इंच और मेरा रंग गोरा है। देखने में बहुत स्मार्ट हूँ क्योंकि जिम में जाने की वजह से मेरा शरीर भी एकदम गठीला हो गया है। मेरे डोले १७ इंच के है और छाती ४५ इंच की है। इतनी जानकारी से मेरे व्यक्तित्व एवं शख़्सियत का अंदाजा तो अब आप खुद ही लगा सकते हैं।

मेरी दीदी निशा और पड़ोसन निधि द्वारा मेरी वर्षगाँठ और उसके बाद के दस दिन तक तोहफे में मुझे बहुत सेक्स दिया। दस दिनों के बाद दीदी तो अपने घर राजगढ़ चली गई और मेरे साथ सेक्स करने के लिए सिर्फ निधि ही रह गई थी! निधि और मैं लगभग अगले डेढ़ वर्ष तक जब भी हमें मौका मिलता था हम सेक्स करते थे और एक दूसरे को संतुष्ट करके दोनों बहुत ही खुश थे! उन दिनों जब भी निधि के पति किसी काम से शहर से बाहर जाते थे तब मैंने पूरी रात उसके ही घर में ही सोता था और उसे खूब चोदता था!
ऐसी ही एक रात को जब निधि के पति तीन दिनों के लिए शहर से बाहर गया हुआ था तब उसके घर में मेरे साथ सेक्स करते हुए उसने बताया कि उसके पति का स्थानान्तरण जयपुर में हो गया था और वह कुछ ही दिनों में राजस्थान से जयपुर चली जायेगी।
उस रात के बाद अगले पन्द्रह दिन तक निधि ने हर रोज़ पति के जाने के बाद दिन के समय या फिर शाम को उनके वापिस आने से पहले मेरे साथ सेक्स ज़रूर करती थी। जयपुर जाने से पहले वह मुझे अपन पता भी दे गई थी और कह गई थी कि जब भी उसके पति शहर से बाहर जायेंगे वह मुझे फ़ोन कर के बुला लेगी लेकिन अफ़सोस आज तक उसका फोन नहीं आया है।
निधि के जाने के बाद अगले छह माह तक मैं बिल्कुल अकेला ही रहा और अपना हाथ जगन्नाथ के सहारे अपनी इच्छाएँ एवं ज़रूरतें पूरी करता था। बीच बीच में तीन-चार दिनों के लिए जब भी निशा आती थी तब वह अपने वादा निभाती थी और उन तीन या चार दिन एवं रातों में अनेक बार मेरी वासना की संतुष्टि करती थी।
पुरानी बीती बातों में उलझा कर मैं आपका अधिक समय बर्बाद नहीं करते हुए आपको उस घटना का विवरण बताना चाहूँगा जो मेरे साथ तीन वर्ष पहले घटी थी।
तब मैं अपने पड़ोस में रहने वाली अपनी शिष्या रेश्मा के साथ सेक्स किया था, उस घटना के समय रेश्मा की उम्र १८ वर्ष थी और वह शाम सात बजे से आठ बजे के बीच में मुझसे विज्ञान पढ़ने के लिए मेरे घर पर आती थी।
रेश्मा की सुन्दरता और शरीर के बारे में कुछ भी कहने के लिए तो मेरे पास शब्द ही नहीं हैं, वह तो एक अप्सरा थी जिसके शरीर का पैमाना था 36-26-36 और जब वह चलती है तो मानो क़यामत आ जाती है। उसका रंग गोरा और चेहरा अंडाकार है तथा नैन नक्श बहुत ही तीखे हैं! ऐसा लगता है कि वह किसी प्रख्यात मूर्तिकार की एक उत्कृष्ट रचना है। आप लोग यह कहानी मस्ताराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है | रेश्मा एक उच्च-माध्यमिक स्कूल मैं 10+2 के अंतिम वर्ष में पढ़ती थी और प्रथम तिमाही परीक्षा में विज्ञान के विषये में उसके अंक कम आने के कारण वह बहुत ही चिंतित रहती थी। उसने अपनी चिंता को अपनी माँ के द्वारा मेरी माँ के साथ साझा करी और मेरी माँ से अनुरोध किया कि वह मुझे कह कर रेश्मा को विज्ञान के विषय में पढ़ा दिया करूँ!
माँ ने रेश्मा की माँ की बात सुन कर उन्हें आश्वासन दे कर भेज दिया और सांझ के मेरे से इस बारे में सारी बात बताई! जब माँ ने मुझ पर रेश्मा को पढ़ाने के लिए दबाव डाला तब मुझे उनकी आज्ञा माननी पड़ी और मैंने उनसे कह दिया कि शाम को ऑफिस से वापिस आने के बाद सात बजे से आठ बजे के बीच में ही उसे पढ़ा पाऊंगा।
अगले दिन से माँ के बताये समय पर रेश्मा हमारे घर आई तो माँ उसे लेकर उपरी मंजिल में मेरे कमरे में ले कर आई और मुझसे परिचय कराया।
माँ के जाने के बाद मैंने रेश्मा से लगभग एक घंटे तक उसकी पढ़ाई और स्कूल के बारे में पूछताछ की तथा विज्ञान में उसे क्या आता है और क्या नहीं आता इसके बारे में जानकारी ली।
फिर अगले दिन मैंने उसे क्या पढ़ाना है उसके बारे में तैयारी करके आने के लिए कह कर घर भेज दिया।
उस दिन के बाद रेश्मा रोजाना शाम सात बजे मेरे कमरे में आ जाती और मुझसे आठ बजे तक पढ़ती और फिर अपने घर चली जाती।पहले दस दिन तक तो वह उस एक घंटे में वह मुझ से बहुत ही संकोच से बात करती थी लेकिन आहिस्ता आहिस्ता उसका संकोच दूर हो गया और वह मुझ से खुल कर बात करने लगी।
एक दिन उसने मुझे यह कह कर मेरा मोबाइल नंबर माँगा कि अगर वह किसी कारणवश किसी दिन पढ़ने के लिए आने को असमर्थ होगी तो वह मुझे पहले ही मेरे मोबाइल पर बता देगी।
मैंने उसकी बात को उपयुक्त समझते हुए उसे अपना नंबर दे दिया तो उसने मेरे मोबाइल पर मिस्ड-काल दे कर अपना नंबर मुझे दे दिया। आप लोग यह कहानी मस्ताराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है | अगले दिन से रोजाना सुबह सुबह छह बजे मेरे फ़ोन पर उसके शुभ-प्रभात के और रात को दस बजे शुभ-रात्रि के सन्देश आने लगे, मैं भी उसे उन संदेशों क उत्तर शुभ-प्रभात तथा शुभ-रात्ति लिख कर भेज देता। धीरे-धीरे वह संदेशों के बदले मुझसे फ़ोन पर शुभ-प्रभात और शुभ-रात्रि कहने लगी और इस तरह हम दोनों की बातचीत का सिलसिला भी शुरू हो गया! पहले तो हम दोनों की सामान्य बातें ही होती थी लेकिन बाद में यह सामान्य बातें सेक्स की तरफ बढ़ने लगी। पढ़ाई के समय तो वह पूरा ध्यान लगा कर पढ़ती और कोई इधर उधर की बात नहीं करती लेकिन उसके घर पहुँचते ही हम दोनों देर रात तक अश्लील बातें करने लगते। जैसे मैं उसे कहता– मुझे तुम्हारा दूध पीने का मन हो रहा है!
तब वह कहती- ज़रूर पिलाऊंगी, लेकिन पहले तुम्हें मुझे अपना मक्खन खिलाना पड़ेगा!
कभी कभी वह कहती- मेरी शर्मगाह में बहुत आग लगी हुई है!
तब मैं उसे उत्तर दे देता- मैं अपनी नली को तुम्हारी शर्मगाह के अन्दर डाल कर उस आग को बुझा दूंगा!
कुछ ही दिनों के बाद रेश्मा ने अधिक अश्लील हो कर लिखा- तुम्हारा लंड कितना लम्बा है?
तब मैंने भी लिख दिया- मुझे उसे नापना नहीं आता, क्या तुम अपनी बिना दांतों वाले मुँह में डलवा कर उसे नाप दोगी?”
उसका जवाब आया- क्या तुम्हारे लंड ने अभी तक किसी चूत में डूबकी नहीं लगाई है?
मेरा उत्तर था- नहीं, अभी तक डुबकी नहीं लगाई है, अगर लगाई होती तो तुम्हें नाप ज़रूर बता देता!!
फिर उसने प्रश्न किया- तुम मेरी चूत में डुबकी कब लगाओगे, मुझे काफी दिनों से उसमें खुजली हो रही है!
उस समय मुझे आगे बात बढ़ाना ठीक नहीं लगा इसलिए मैंने कोई उत्तर नहीं दिया और फ़ोन काट दिया। उसकी बातों पर विचार करने के बाद मुझे विश्वास हो गया था कि आग दोनों तरफ लगी हुई है और रेश्मा मुझसे भी अधिक आतुर थी मेरे नीचे लेटने को ! आप लोग यह कहानी मस्ताराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है | हम दोनों ही एक दूसरे में समाने के लिए बेताब हो रहे थे क्योंकि मेरे और उसके दिन अपना हाथ जगन्नाथ करते करते कट रहे थे! अक्सर सेक्स की बातें करते करते हम दोनों कब झड़ जाते पता ही नहीं चलता था।
करीब चार महीनों तक हम दोनों के बीच में ऐसे ही बातचीत चलती रहा क्योंकि हमें हम-बिस्तर होने के लिए कोई जगह नहीं मिल रही थी। रेश्मा को मेरा कमरा पढ़ाई का मंदिर लगता था और घर में दूसरी जगह सुरक्षित नहीं थी। रेश्मा की उम्र भी छोटी होने के कारण मैं उसे कहीं बाहर ले जाने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा था!
कहते है कि किसी भी काम में देर हो सकती है परन्तु अंधेर नहीं हो सकता है, और यह भी कहते हैं कि जब मिलता है तो छप्पर फाड़ कर मिलता है। ऐसे ही कुछ दिन हमें भी मिल गए क्योंकि मेरे नाना जी को दिल का दौरा पड़ने से हस्पताल में भरती कर दिया गया! माँ और पापा को उनको देखने के लिए जाना पड़ा और चार दिनों के लिए मेरे घर अन्य कोई नहीं था।  रेश्मा तो मुझे डुबकी लगवाने के लिए पहले से ही बहुत आतुर थी इसलिए जब मैंने उसे बताया कि चार दिनों के लिए मेरे घर में कोई भी नहीं होगा तो वह ख़ुशी के मारे नाचने लगी।
हम दोनों द्वारा बनाई योजना के अनुसार रेश्मा ने अपने माँ से कह दिया कि अगले सप्ताह उसके कक्षा टेस्ट है इसलिए उनकी तैयारी करने के लिए उसे अगले चार दिन शाम छह बजे से आठ बजे तक पढ़ने के लिए जाना पड़ेगा।
और फिर रेश्मा ने माँ से अनुमति लेकर उसी दिन शाम छह बजे मेरे घर पहुँच गई।
रेश्मा को शायद हम-बिस्तर होने की अधिक जल्दी थी क्योंकि जब मैंने उसे पढ़ने के लिए ऊपर कमरे में चलने के लिए कहा तो वह मुँह बनाने लगी। आप लोग यह कहानी मस्ताराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है |
मैंने उसे समझाया कि पहले पढ़ाई करेंगे और उसके बाद मौज-मस्ती ! अगर पहले मौज-मस्ती करेंगे तो फिर थकान के कारण पढ़ाई में मन नहीं लगेगा और कुछ समझ भी नहीं आएगा।

मेरी बात सुन कर वह मान गई और उपर के कमरे में पढ़ने के लिए चल पड़ी और एक घण्टे तक मुझसे हर रोज़ की तरह पढ़ी।  लगभग सात बजने वाले थे जब पढ़ाई समाप्त हुई तब वह मेरी ओर लालसा भरी नजरों से देखने लगी। मैंने उसकी आँखों से आने वाले संकेतों को पढ़ कर जैसे ही उसके उरोजों पर हाथ रखे तो उसने मेरे हाथों को झटक कर अलग कर दिए। आप लोग यह कहानी मस्ताराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है |
मैंने विस्मय की दृष्टि से जब उसकी ओर देखा तो उसने कहा- यहाँ इस पढ़ाई के मंदिर में नहीं, कहीं और ले चलो, वहीं पर जो करना होगा वह करेंगे!
उसकी इच्छा का सम्मान करते हुए मैं उसे नीचे की मंजिल में माँ-पापा के बैडरूम में ले आया! उस कमरे में पहुँचते ही रेश्मा का रंग ढंग ही बदल गया और उसका चेहरा ख़ुशी से चमक उठा तथा मेरे साथ चिपक कर बैठ गई।
फिर उसने मेरे दोनों गालों पर अपने हाथ रख कर थोड़ा अपनी ओर खींचा और अपने दोनों होंठ मेरे होंठों पर रख दिए।  मैंने भी उसका साथ देते हुए उसे चूमने लगा और अगले पन्द्रह मिनट तक हम दोनों एक दूसरे से चिपके चुम्बनों का आदान प्रदान करते रहे। मैंने उसके होंठों के साथ साथ उसके माथे, आँखों, नाक, गालों, ठोड़ी और गर्दन को भी चूमा जिससे वह बहुत गर्म हो गई।  उसने मुझे अपने बाहुपाश में जकड़ कर जब मेरे चेहरे को चूम चूम कर गीला कर दिया तो मैं भी गर्म होने लगा, मेरे से रहा नहीं गया और मैं अपने दोनों हाथों से उसके उरोजों को दबाने लगा।
रेश्मा भी मेरा साथ देने लगी और मेरी सहूलियत के लिए उसने अपनी चुनरी हटा कर दूर फर्श पर फेंक दी!
कुछ देर उसके उरोज दबाने के बाद मैंने उसकी कुर्ती को थोड़ा ऊँचा किया तो रेश्मा तुरंत उसे भी उतार कर अपनी चुनरी के पास फर्श पर फेंक दिया!
अब उसके ऊपरी धड़ में सिर्फ एक सफ़ेद ब्रा में कैद थी और उसके गोरे उरोजों के रंग के सामने उसकी ब्रा का सफ़ेद रंग भी फीका लग रहा था। मैंने जब उसकी ब्रा के ऊपर से ही उसके उरोजों को पागलों की तरह दबाने और चूसने एवं चाटने की चेष्टा करने लगा तो रेश्मा ने कहा- ठहरो, इसे अपनी थूक से गीला मत करो, मैं इस भी उतार देती हूँ!
इतना कह कर रेश्मा ने दोनों हाथ पीछे करके अपनी ब्रा का हुक खोल दिया और ब्रा को उरोजों से अलग करते हुए चुनरी और कुरती के ऊपर फेंक दी।
उसके दृढ़ और उठे हुए उरोजों को देख कर मैं आपे से बाहर हो गया और उन रेशम से मुलायम उरोजों की चुचूक को अपने मुँह में ले कर चूसने लगा।
कुछ ही क्षणों में मैंने देखा कि रेश्मा आहें एवं सिसकारेश्माँ भरने लगी है और अपनी सलवार के ऊपर से ही अपनी शर्मगाह पर हाथ रख कर उसे दबाने लगी थी।
मुझे एहसास हो गया कि मेरे द्वारा उसके चुचूक चूसने से उसकी शर्मगाह के अन्दर खलबली होनी शुरू हो गई थी और वह उसे दबाने की कोशिश कर रही थी। मैंने रेश्मा से अलग होकर तुरंत उसे खड़ा किया और उसकी सलवार का नाड़ा खींच कर खोल दिया, उसकी खुली सलवार नीचे सरक कर फर्श गिर गई और अब वह मेरे सामने सिर्फ आधी गिठ कपड़े से बनी पैंटी में खड़ी थी। आप लोग यह कहानी मस्ताराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है | मैं अपने को रोक नहीं पाया और मैंने उसकी पैंटी के ऊपर से ही उसकी शर्मगाह पर जब हाथ फेरा तो उसे बहुत गीला पाया। उस गीलेपन को महसूस करते ही मैं उत्तेजित हो उठा और तब मैंने रेश्मा की पैंटी को नीचे की ओर खींच कर उसके पैरों में डाल दिया। अब रेश्मा मेरे सामने बिल्कुल नग्न खड़ी थी और अगले ही क्षण मैं उसके एक नग्न उरोज को चूस रहा था और अपने हाथों से उसके दूसरे उरोज और उसकी शर्मगाह को मसल भी रहा था।
मेरे चूसने और मसलने की क्रेश्मा से रेश्मा बहुत उत्तेजित हो उठी और उसने मेरे लोअर पर अपना हाथ फेर कर मेरे लंड को ढूंढने लगी! मैंने उसकी सहायता करी और उसके हाथ को पकड़ कर अपने लोअर के अंदर डाल दिया! मेरा लंड उसके हाथ में आते ही उसने लंड और टट्टों को जोर से मसलने लगी और उत्तेजना की वृद्धि के कारण बहुत ही जोर से आहें एवं सिसकारेश्माँ भरने लगी!
मैं उससे अलग हो कर उसकी चूत को चूसने की सोच ही रहा था तभी उसने मुझे अपने से अलग किया और मेरे कपड़े उतारने शुरू कर दिया। मैंने भी उसकी सहायता की और शीघ्र ही हम दोनों एक दूसरे के सामने नग्न खड़े थे।
रेश्मा ने मुझे ऊपर से नीचे देखा और मेरे लंड को देखते ही अपने दोनों हाथों से अपने खुले मुँह को ढकते हुए बोली- हाय माँ, इतना बड़ा लंड है तुंम्हारा ! अगर तुम इसे मेरी चूत के अन्दर डालोगे तो वह तो ज़रूर फट जायेगी और मैं दर्द के मारे चीखते चिल्लाते मर जाऊँगी!
मैंने पूछा- तुम कैसे कहती हो कि यह बहुत बड़ा है?
उसने कहा- इतना लम्बा और मोटा है, मैंने तो पहले कभी ऐसा लंड देखा ही नहीं है!
मैंने कहा- ऐसे ही बोले जा रही हो, पहले इसे नाप कर तो देख लो, यह ज्यादा बड़ा नहीं है!
मेरी बात सुन कर रेश्मा ने मेरे लंड को पकड़ा और उसे उलट पलट कर देखने लगी और फिर बोली- लम्बाई में तो यह लगभग छह से सात इंच के बीच में होगा लेकिन मुझे इसकी मोटाई बहुत ज्यादा लग रही है! मुझे डर लग रहा है कि इसकी मोटाई तो मेरी चूत को बुरी तरह फाड़ कर रख देगी और उसे सिलवाने के लिए किसी डॉक्टर के पास ही जाना पड़ेगा!
रेश्मा की बात सुन कर मैंने अपनी हंसी पर नियंत्रण कर के बोला- ठीक है, तो फिर हम आगे कुछ नहीं करते! तुम अपने कपड़े पहन लो और मैं तुम्हें थोड़ी देर और पढ़ा देता हूँ!
मेरी बात सुन कर चुप हो गई और आगे बढ़ कर मुझसे चिपक कर बोली- नहीं, अब आगे जो करना है वह करो! जो होना होगा वह देखा जाएगा! उसकी बात सुन कर मैंने उसे उठाया और बिस्तर पर लिटा दिया! फिर मैंने उसकी टाँगे चौड़ी करी और उसकी चूत पर अपना मुँह रख कर उसे चाटने लगा। तभी रेश्मा मेरे लंड को खींचने लगी और अपना मुँह खोल कर मुझे इशारे से उसे चुसवाने के लिए कहने लगी। आप लोग यह कहानी मस्ताराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है | तब मैंने 69 की स्तिथि बनाई और अपनी टांगों के बीच उसका सिर करके उसके मुँह में अपना लंड दे दिया।
मैंने अभी रेश्मा की चूत को पांच मिनट के लिए ही चाटा था कि वह आईई… आईई… करके चिल्लाई और अपने शरीर को अकड़ाते हुए अपने कूल्हों को ऊँचा उठा कर मेरे मुँह में अपना पानी छोड़ दिया।
जब उसका थोड़ा नमकीन और थोड़ा खट्टा पानी मुझे अच्छा लगा तब मैंने सारा का सारा चाट लिया। इसके बाद अगले नौ मिनट में रेश्मा ने इसी तरह हर तीन मिनट के बाद अपना पानी छोड़ा जिसे मैं चाटता रहा।
वह आह.. आह… आह… आह… की सिसकारेश्माँ निकाल रही थी और मुझसे बार बार लंड को उसकी चूत के अन्दर डालने के लिये आग्रह कर रही थी।
मुझे चुदाई का अनुभव नहीं होने के कारण वह उसे होने वाले दर्द और दिक्कत से डर भी रही थी। मैंने उसे समझाया कि मुझे जो कुछ भी ब्लू फ्लिम्स देखने तथा दोस्तों से पता चला था उसके अनुसार करने से उसे कोई भी दिक्कत नहीं होने दूंगा।
मेरे द्वारा उसके भगांकुर पर जीभ से चाटने से बहुत ही गर्म हो गई थी इसलिए उसने कह दिया- तुम चुदाई शुरू तो करो, जो भी होगा मैं सह लूंगी!
रेश्मा ने मेरे लंड को लौलीपॉप की तरह चूस कर मुझे बहुत ही अधित उत्तेजित कर दिया था जिसके कारण मुझे बहुत मुश्किल हो रही थी। मेरा लंड उत्तेजना में फूलता जा रहा था और ऐसा लगता था कि वह फटने जा रहा था इसलिए मैंने अपने लंड को उसके मुँह से बाहर निकाल लिया, फिर सीधा होकर उसकी टांगों के बीच में बैठ गया और पहले उसकी चूत में खूब सारी थूक लगा कर उसमें एक उंगली डाली!
उसकी चूत उत्तेजना के कारण बहुत कसी हुई थी और उंगली अन्दर जाते ही वह दर्द से कराहने लगी।
मैंने उसका ध्यान बंटाने के लिए उसके चूचे भी दबाने लगा तो वह आह… आह… ऊह… ऊह… जैसी सेक्सी आवाजें निकालने लगी। वह बार बार लंड को चूत में डालने के लिए कहने लगी तब मैंने देर न करते हुए पहले से ही लाये हुए कंडोम को अपने लंड पर चढ़ा लिया, फिर अपने लंड को उसकी चूत के होंठों के बीच में रख कर उसे अन्दर घुसाने की कोशिश करने लगा लेकिन उसकी चूत बहुत कसी हुई थी।
मैंने उसकी चूत पर अपने लंड को पकड़ कर थोड़ा जोर लगा कर लंड को दबाया तो ‘फक्क’ की आवाज करते हुए उसका सुपारा अन्दर घुस गया। चूत के अन्दर सुपारे के जाते ही वह चिल्लाई- आहह… हाईई… मर गई, प्लीज मुझे छोड़ दो, बहुत दर्द हो रहा है!
वह जोर जोर से चिल्लाते हुए दर्द से छटपटाने लगी तब मैंने उसे कस के जकड़ लिया और साथ में उसके होंठों को चूमने लगा और उसकी चूचियों को भी दबाने लगा!
जब वो थोड़ी देर में सामान्य हो गई तब मैंने उसके होंठों पर अपने होंठ जोर से दबा कर उसकी जीभ अपने मुँह में ले ली और नीचे से अपने लंड को धीरे धीरे अन्दर बाहर करना शुरू दिया!
कुछ देर के बाद जब उसे आनन्द आने लगा मैंने एक धक्का मारा और तीन इंच से ज्यादा लंड उसकी चूत के अन्दर घुसा दिया। आप लोग यह कहानी मस्ताराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है | वह एक बार फिर दर्द से बुरी तरह छटपटाने लगी लेकिन उसकी जीभ मेरे मुँह में थी और मेरे होठों से उसके होंठ बंद होने की कारण उसकी आवाज नहीं निकल पाई। मैंने भी उसे पूरी तरह से अपने नीचे जकड़ा हुआ था जिससे वह हिल भी नहीं पा रही थी। उसकी चूत से खून निकलने लगा था क्योंकि उसकी झिल्ली फट चुकी थी।
मैं अगले पांच मिनट तक उसे इसी तरह चूमता रहा और उसकी चूचियाँ भी दबाता रहा। जब उसे कुछ ठीक महसूस होने लगा तब मैं उसके चुचूकों को अपनी उँगलियों से रगड़ने लगा जिससे उसकी उत्तेजना बढ़ गई और उसे दर्द भी काफी कम महसूस होने लगा था।
तब मैं आहिस्ता आहिस्ता हिलने लगा और अपने लंड को उसकी चूत के अन्दर बाहर करने लगा जिससे रेश्मा को आनन्द आने लगा था। वह उस आनन्द अनुभूति में बह गई और उसने मुझे आगे करने का इशारा कर दिया, तब मैंने उसे थोड़ा ढीला छोड़ा और अपने लंड को आगे पीछे करते हुए धीरे धीरे उसे पूरा अन्दर तक घुसा दिया।
अब रेश्मा की चूत में मेरा साढ़े छह इंच का लंड पूरा घुस कर अन्दर बाहर हो रहा था।
रेश्मा अब आह… आह… उह… उह… आह… आउच… आह मर गई… आह… ऒह… की सिसकारेश्माँ भरने लगी थी। साथ में वह अपनी कूल्हे उठा उठा कर चुदाई के लिए मेरा साथ देने लगी थी। हम दोनों के आनन्द में जब कुछ वृद्धि हुई तभी उसके कहने पर मैंने लंड को तेजी से उसकी चूत के अन्दर बाहर करने लगा। तेज़ चुदाई करते हुए मुझे अभी दो से तीन मिनट ही हुए थे कि रेश्मा जोर से आईई… करके चिल्लाई और टाँगें भींच कर थोड़ा सा अकड़ते हुए अपना पानी छोड़ दिया। आप लोग यह कहानी मस्ताराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है | उस पानी से चूत के अन्दर फिसलन हो गई थी और उसमे मेरा लंड बहुत ही तेज़ी से अन्दर बाहर होने लगा जिससे कमरे में फच फच की आवाज़ भी गूंजने लगी! इस फच फच को अभी दो से तीन मिनट ही हुए थे कि रेश्मा एक बार फिर आईई… करके चिल्लाई और बहुत जोर से टाँगों को भींचते हुए उसका पूरा शरीर अकड़ गया और उसकी चूत सिकुड़ गई तथा मेरे लंड को जकड़ लिया! मैं फिर भी हिलता रहा जिससे हम दोनों को जो रगड़ लगी उसके कारण हम दोनों एक साथ ही झड़ गए।
रेश्मा उस अकड़न और खिंचावट होने के बाद एकदम निढाल सी बिस्तर पर लेटी रही और मैं भी थक कर निढाल सा उससे चिपक कर उसके ऊपर ही लेट गया। हम दोनों की साँसें हमारे काबू में नहीं थी हम बुरी तरह हांफ रहे थे। थोड़ी देर बाद जब मेरी सांस में सांस आई तब मैं उसके ऊपर से उठा तो देखा की उठने की चेष्ठा करने पर भी उससे उठा नहीं जा रहा था।
तब मैंने उसे गोदी में उठाया और अपने साथ ही बाथरूम लेकर जा कर उसकी चूत तथा अपना लंड साफ़ किया!
जब हम वापिस बैडरूम आने लगे तब रेश्मा से ठीक से चला नहीं जा रहा था इसलिए मैं उसे सहारा देकर बिस्तर तक लेकर आया! बिस्तर पर बिछी चादर पर जब उसने खून देखा तो वो थोड़ा घबरा गई और उसके चेहरे पर हवाइयाँ उड़ने लगी!
तब मैंने उसे समझाया कि यह सिर्फ पहली बार ही होता है अब अगली बार जब करेंगे तब खून नहीं आएगा! मेरी बात सुन कर वह कुछ आश्वस्त दिखाई दी और कपड़े पहन कर घर जाने को तैयार हो गई!
मैं रेश्मा को जब उसके घर तक छोड़ने गया तब रास्ते में उसे परामर्श दिया कि चूत की दर्द को दूर करने के लिए वह सोने से पहले उसको गर्म पाने से सेक कर लेगी तो हम कल फिर डुबकी लगा सकते हैं!
रेश्मा को छोड़ कर वापिस आने के बाद मैंने बिस्तर की चादर को धोकर सुखाने के लिये डाल दिया और नई साफ़ चादर बिस्तर पर बिछा दी और खाना खाकर सो गया!
अगले दिन रेश्मा साढ़े पांच बजे ही मेरे घर आ गई और कहा कि मैं उसे ‘जल्दी से पढ़ाई करा दूँ क्योंकि उसने मेरे लंड को डुबकी लगवानी है!’
मैं भी यही चाहता था इस लिये आधे घंटे में उसे पढ़ा कर हम नीचे वाले बैडरूम आ गए और एक दूसरे को नंगा करके 69 की स्थिति में एक दूसरे को चूस एवं चाट कर उत्तेजित कर दिया। उत्तेजित होने के बाद रेश्मा को बहुत ही जल्दी थी इसलिए वह बिना प्रतीक्षा करे मेरे ऊपर चढ़ कर बैठ गई और मेरा लंड अपनी चूत में डाल कर उछल उछल कर चुदना शुरू कर दिया।
अगले पन्द्रह मिनट में उसने तीन बार अपना पानी छोड़ा और फिर मेरे नीचे आकर लेट गई और मुझे उसे चोदने के लिए कहा। मैं इसके लिए तैयार था इसलिए बिना समय गवाएं मैंने उसकी चुदाई शुरू कर दी और पांच मिनट में ही उसे चरम-सीमा पर पहुँचा दिया! पिछले दिन की तरह उसने चिल्लाते हुए शरीर के अकड़ाया, चूत को सिकोड़ा और मेरे साथ ही झड़ गई! फिर मैं उसी तरह अपने लंड को उसकी चूत में डाले ही उसके साथ कर चिपट कर लेट गया।
थोड़ी देर आराम करने के बाद हमने एक दूसरे को दुबारा तैयार किया और चुदाई शुरू कर दी।
इस बार मेरा आधा घंटे बाद झड़ा और तब तक वह चार बार झड़ गई! उसके बाद हमने बाथरूम में जाकर एक दूसरे को साफ़ किया और तारो ताज़ा हो अपने कपड़े पहन कर दोनों ने मिल कर बैडरूम को ठीक किया! दोस्तों आपलोगों की कहानिया मै रोज मस्तराम डॉट नेट पर पढता हु और आज मैंने भी अपनी कहानी लिख डाली फिर दोस्तों आगे अभी ढेर सारी लडकियों को चोद चूका हु मैंने करीब १७ लडकियों की सील तोड़ी है वो सब कहानिया लिख के बताऊंगा तब तक इन्तेजार करते रहिये और पढ़ते रहिये मस्तराम डॉट नेट मस्त रहिये | समाप्त

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