मैं अमृता सिंह आप सभो को अपनी सेक्सी कहानी कामुक स्टोरी डॉट कॉम पर सुना रही हूँ. आशा करती हूँ मेरी कहानी आप लोगो को जरुर पसंद आएगी. मेरी शादी जय सिंह  से पक्की कर दी गयी थी, पर ३ महीने तक शादी का मुहूर्त नही था. दोस्तों आप तो जानते ही होंगे की हिन्दू रीति रिवाजों में सुबह दिन का बड़ा महत्व है. अगर सुबह दिन शादी होती है तो वो जिन्दगी भर चलती है. पर अगर अशुभ तारिक में विवाह हो जाए तो सारी जिन्दगी दिक्कते और मुश्किले लगी रहती है. इसी वजह से मेरी और जय की शादी ३ महीने के लिए तल गयी. पर हम फोन पर बात करने लगे और घर से बाहर मिलने लगे.

एक दिन जब मैं जय के साथ एक कॉफ़ी शॉप में बैठी कॉफ़ी पी रही थी तो जय बड़ा ही ठरकी महसूस कर रहा हूँ. शॉप में ही वो मुझसे चिपककर बैठा हुआ था और मेरे हाथ को अपने हाथ में लेकर किस कर रहा था. मैंने काली जींस और काला झब्लेदार टॉप. ये टॉप अभी मैंने नया नया ही एक माल से ख़रीदा था. एक बहुत हीं सुंदर था. मेरा मंगेतर जय बार बार मेरा हाथ चूम रहा था और मेरे मम्मे पर हाथ लगा रहा था. कॉफ़ी शॉप में बड़ी भीड़ थी, इसलिए मैं उसे बार बार मना कर रही थी. पर जय को तो चुदास चढ़ी थी.

बोलो?? कुछ जवाब तो दो??’ उसने फिर कहा

क्या यारररर??’ मैंने रूखेपन से कहा

बता ना चूत देगी??? दे न यार कितने दिन से तुझको याद करके मुठ मारता हूँ. जानम देना चूत!’ जय बोला

नहीं शादी से पहले नही’ मैंने कहा

‘अरे यार अमृता!! वो वो जमाना चला गया यार. अब तो लडकियाँ अपने मंगेतर से पहले ही चुदवा लेती है. अरे यार आदमी चाँद पर पहुच गया और तू वही पुराणी सोच लेकर बैठी है!…अमृता!! यार चूत देना!!’ जय बोला और बार बार मिन्नतें करने लगा.

दोस्तों, बाहर से तो मैं मना कर रही थी, पर अंदर से मेरा भी मन चुदवाने का था. आज तक मैंने भी कभी लौड़ा नही खाया था. ये कैसा होता है??, कैसे चूत मारता है? कितना मजा आता है?? ये सारे सवाल मेरे मन में थे. मैं मान गयी.

‘ठीक है. बता कहाँ चोदेगा??’ मैंने अपने मंगेतर से कहा

होटल चलते है!! जय बोला.

हम दोनों होटल में आ गए. मेरे मंगेतर जय ने मुझे पकड़ लिया. वो मेरे ओंठ पीने लगा. धीरे धीरे उसने मुझे नंगा कर दिया. ये मेरा पहली बार था. किसी लड़के से मैं पहली बार गले मिल रही थी. जय ने भी कपड़े निकाल दिए. उसका लौड़ा बहुत बड़ा, बहुत काला था किसी सांप की तरह.

ऐ अमृता!! ले छूकर देख! इसे ही लौड़ा कहते है. कभी देखा है पहले??” जय प्यार से मुस्कुराते बोला. मैं हँसने और शर्माने लगी. मेरे मंगेतर जय का लौड़ा मुझे बड़ा अजीब और बहुत आकर्षक लगा. जय ने जबरन मेरे हाथ पकड़ के लौड़े पर रखवा दिया. मैंने डरते डरते जय के लौड़े को अपने हाथ में भर लिया. कितना बड़ा, कितना चिकना, कितना सुंदर और कितना शानदार, दोस्तों पहली नजर में मेरी येही प्रतिक्रिया थी. धीरे धीरे मेरी शर्म, और झिझक दूर हो गयी. मैंने आँखें खोल ली और लौड़े को खुलकर छूने लगी. मंगेतर जय ने मेरे हाथ पर अपना हाथ रख दिया. ‘देख!! इस तरह से इसको फेटते है!’ जय बोला और मुझे लौड़ा फेटना सिखाने लगा. दोस्तों, ये मेरी ये सब बहुत नया और बहुत शानदार था. धीरे धीरे मैं उसका लौड़ा फेटने लगी. जय का लौड़ा खड़ा होने लगा. मैं उस काले पर मोटे १० इंच के लौड़े को मजे से फेटने लगी. कुछ समय बाद जय का लौड़ा किसी सख्त चैले की तरह हो गया था. जैसे मांस और हड्डी का नही बल्कि लोहे का बना हो. ‘अमृता!! बीबियाँ अपने पति का लौड़ा मुँह में लेकर चूसती है’ जय बोला. उसने नंगे ही नंगे मुझे जमीन पर बिठा दिया. और मेरा ओंठ खोलकर मुँह में अपना काला कलूटा लौड़ा दे दिया. मैं बड़ी हैरान थी की जय तो काफी गोरा है पर उसका लौड़ा काला कैसे. ‘जय तुम तो इतने गोरे चिट्टे हो, पर तुम्हारा लौड़ा काला कैसे??”मैंने मासूमियत से पूछा.

‘अरे जानम!! एक बार जरा अपनी चूत देखो!’ जय बोला

मैंने अपनी चूत देखी. बहुत काली काली थी जबकि मैं बहुत सुंदर, बहुत गोरी थी.

‘जानम. इंडिया में हर लड़के का लौड़ा काला ही होता है और हर लड़की की चूत काली ही होती है’ जय बोला. फिर उसने मेरे मुँह में अपना १० इंच का सिलबट्टे जैसा लौड़ा दे दिया और चुस्वाने लगी. ‘बेबी! इसको हाथ से फेट फेटकर चूसू’ जय बोला. दोस्तों, आज पहली बार मैं किसी लडके का लौड़ा चूस रही थी. जय के काले बदसूरत लौड़े से हल्की हल्की बदबू आ रही थी. पर वो मेरा होने वाला पति था. इसलिए मुझे उसका लौड़ा चुसना ही था. मैं अपने नाजुक गोरे हाथों से जय का लौड़ा फेटने लगी और मुँह हिला हिलाकर चूसने लगी. जय को तृप्ती मिलने लगी. दोस्तों फिर धीरे धीरे मुझे अपने मंगेतर का लौड़ा बहुत जादा पसंन्द आ गया. मैं जोर जोर से किसी रंडी की तरह सिर हिला हिलाकर चूसने लगी. मेरे अंदर कामवासना और चुदासा जाग गयी. मेरे अंदर की चुदासी औरत जाग गयी. मैंने आँख बंद कर ली. हाथ को जोर जोर से मंगेतर के लौड़े पर फेटने लगी और मुँह चला चलाकर चूसने लगी. मैं इतनी जादा चुदासी हो गयी की जय की काली काली गोलियां भी चूसने लगी. उसका सुपाडा बहुत गुलाबी था, किसी मोम्बत्ते की तरह मोटा सा था. जय के लौड़े की खाल पीछे की तरफ खिंची हुई थी. मुझे अजीब लगा.

‘जय तुम्हारे लौड़े की खाल ये पीछे क्यों है??” मैं नादानी से पूछा

‘अरी जानम! इसी लौड़े से मैंने कई लड़कियां चोदी है! इसीलिए इसकी खाल पीछे भाग गयी है’ जय बोला

मैं शर्मा गयी. फिर जय ने मुझे बेड पर लिटा दिया. मेरे मम्मे पीने लगा. पर सबसे जादा तलब उसको मेरी चूत देखने की थी. ‘अमृता! तेरी चूत बहुत सुंदर है. मैंने कई चूत मारी है अभी तक. पर तुम्हारी चूत सबसे जादा सुंदर है’ जय बोला. मुझे ये सुनकर गर्व हुआ. दोस्तों, हर सुबह मैं जब भी नहाती थी अपनी चूत जरुर देखती थी. मुझे भी अपनी चूत बहुत खूबसूरत लगती थी. आज देखो मेरे मंगेतर ने भी मेरी चूत की तारीफ़ कर दी थी. जय बड़ी देर तक मेरी गुलाबी चूत के दर्शन करता रहा. फिर वो मेरी चूत पीने लगा. अपने ओंठ को लगा लगाकर मेरी चूत पीने लगा. फिर कुछ देर बाद वो मुझे चोदने लगा. आज पहली बार मैं चुदवा रही थी. चुदवाने से आज मेरी चूत खुल गयी और चूत के दोनों ओंठ खुल गये. शुरू शुरू में बहुत गन्दा लगा. लगा की उलटी आ जाएगी. जय ने मुझे अपने में समेट रखा था. समेतकर वो मुझे चोद रहा था. शुरू शुरू में चुदाई बड़ी अजीब लगी की ये क्या बला है. ये भी कोई काम है क्या. पर फिर कुछ देर बाद मुझे मजा आने लगा.

मेरे मंगेतर जय ने मुझे गोद में बिठा लिया. मेरी चूत में लौड़ा दे दिया. मेरी कमर को दोनों हाथों से उसने पकड़ लिया. और जोर जोर से गोद में उठाकर चोदने लगा. धीरे धीरे मुझे खुद भी मजा आने लगा. मैंने अपना पिछवाड़ा और गांड उठा उठाकर खुद चुदवाने लगी. जय मुझे बड़ी जोर जोर से चोदने लगा. मेरी मुलायम चूत में उसने अपना लोहे जैसा सख्त लौड़ा दे दिया था. और किसी रंडी की तरह मुझे चोद रहा था. घपर घपर करके मेरे मंगेतर जय का लौड़ा मेरी चूत को कूट रहा था. फिर कुछ देर बाद उसने मुझे कसके पकड़ लिया. अपने में भींच लिया. मैं सोचने लगी की जरूर कुछ कमाल होने वाला है. जय अब बेतहाशा धक्के देने लगा. मुझे तो शानदार तरह से चोद रहा था. उसके लौड़े की धमक, रफ्तार से मेरी नाजुक चूत के परखच्चे उड़ गये थे. मेरी चूत से धुआं निकल गया था.

जय मुझे खट खट करके हचक हचक के चोद रहा था. मेरी सासें तेज हो गयी थी. उधर जय की सासें भी किसी धौकनी की तरह चल रही थी. मेरी नाजुक योनी में उसका लौड़ा घुसा हुआ था जोर जोर से मेरी योनी को चोद रहा था. मेरे पुरे शरीर में सुख के गोल गोल छल्ले निकल रहे थे. मुझे चुदवाने में बड़ा मजा आ रहा था. अब मैं जान पाई थी की ये चुदाई क्या चीज होती है. फिर मेरे मंगेतर जय ने अपना गर्म गर्म माल मेरी चूत में छोड़ दिया. हम दोनों बिस्तर पर गिर गये.

‘क्यूँ अमृता जान! मजा आया चुदवाने में??” जय से हँसते हुए पूछा.

हाँ! बहुत मजा आया’ मैं झेपते झेपते कहा. कुछ मिनटों बाद फिर से हमदोनो का मौसम बन गया था. मैं चुदवाना चाहती थी, और मेरा मंगेतर जय मुझे चोदना चाहता था. उसने मुझे पेट के बल बेड पर लिटा दिया. मेरे उपर लेट के मेरी नंगी चिकनी पीठ, कंधे, कुल्हे, मेरे मुलायम पुट्ठे चूमने लगा. फिर किसी कुत्ते की तरह चाटने लगा. मैं पेट के बल सीधा लेती थी. जय ने मेरी चूत के नीचे एक तकिया लगा दी जिससे वो उपर से मेरी चूत मार सके. तकिया लगाने से मेरी चूत जरा उपर उठ गयी. जय मेरी से मेरी चूत पीने लगा. फिर उसने अपना लौड़ा पीछे से मेरी चूत की फांक में सरका दिया और मेरे उपर लेट गया और मुझे चोदने लगा. दोस्तों, मुझे बड़ा मजा आया ये देखकर. अभी तक तो मैं समझ रही थी की किसी लडकी को सामने से ही चोदा जाता है. पर अब मैंने देखा की जय मुझे पीछे से चोद रहा था.

वाओ! जय तुम तो महान चुदक्कड हो. मैं तो सोच भी नही सकती की पीछे से भी किसी लड़की को चोद सकते है! ये तो सचमुच कमाल है’ मैं अचरज से कहा

‘जानम!! हर हफ्ते मेरे साथ इस होटल के कमरे में आ जाना. तुमको हर बार एक से बढ़के एक कमाल दिखाउंगा’ जय बोला और मुझे चोदने लगा. एक नया तरीका चुदाई का, एक नया अहसास मुझे मिला. सामने से दुसरा टेस्ट आता है. पर पीछे से चुदवाने में दूसरा टेस्ट आता है. जय मुझे कंधे काट काटकर चोदने लगा. मेरी चूत आज अच्छे से फट गयी थी. वहीँ मेरे मंगेतर का १० इंची लौड़ा पूरा का पूरा मेरे लाल लाल भोसड़े में घुस गया था और मुझे चोद रहा था. फिर जय ने मेरे दोनों सफ़ेद पुट्ठों को कसके बीच की दिशा की ओर करके पकड़ लिया. और घप घप करके चोदने लगा. इस हरकत से मेरी चूत और भी जादा कस गयी और चुदवाने में और मजा आने लगा.

‘आह आहा हा हा हा !!’ करके मैं चिल्लाने लगी.

‘ले छिनाल!! ले ले ले !! ले लम्बा लम्बा !!’ जय बोला और मेरे चूतर आपस में कसकर मुझे बड़ी देर तक चोदता रहा. फिर कुछ देर बाद वो झड गया. जब उसने अपना हथियार [लौड़ा]  निकाला तो उससे अभी भी माल टपक रहा था. जय के लौड़े के माल की कई गाढ़ी चिपचिपी बूंदे मेरे गोल मटोल सफ़ेद चूतड़ों पर गिर पड़ी. जय जीभ लगाकर अपना माल खुद चाटने लगा. और पूरा माल चाट गया. ‘चल छिनाल!! पी इसको’ जय बोला और उसने मुझे सीधा लिटा दिया. मेरे गुलाबी गुलाबी नाजुक पंखुड़ी जैसे ओंठों में जय ने अपना लौड़ा घुसेड़ दिया. मैं उस वक़्त बहुत जादा चुदासी थी. दिल तो यही कर रहा था की जय कभी न झड़े और यूँ ही हमेशा मुझे चोदता रहे. पर कुदरत के नियम को कौन बदल सकता है. इसलिए मैं अपने मंगेतर का लौड़ा मजे से चूसने लगी. मैं २ बार चुदवा चुकी थी. पर जय का लौड़ा इतना ताकतवर था की ढीला ही नही हो रहा था. मैं उसके लाल लाल मोम्बत्ते जैसे सुपाड़े को पी रही थी. कुछ समय बाद हम दोनों ने होटल का कमरा छोड़ दिया.

जैसे ही २ ४ दिन बीते मेरा फिर से चुदवाने का मन करने लगा. मैं जय से रोज फोन पर बात कर लेती थी.

‘हेलो जान कैसे हो??’ मैंने फोन पर पूछा

‘अच्छा हूँ. तुम्हारी याद आ रही है.  चुदवाकर कैसा लगा. बोलो मजा आया की नही?” जय बोला

‘बहुत मजा आया जान. तुम विश्वास नही करोगे की आज फिर मेरा चुदवाने का मन कर रहा है! काश तुम यहाँ मेरे पास होते तो मेरी चूत मारते. मेरी चूत में अपना १० इंची मोटा काला लौड़ा देते’ मैं नाराजगी दिखाते कहा. जय मचल गया. उसने मुझे शाम ४ बजे बस स्टॉप पर आने को कहा. मैं मुँह में स्टाल बांधकर बस स्टॉप पर आ गयी. जय आ गया. मैं उसकी बाइक पर बैठ गयी. हमदोनो सीधा चिड़िया घर आ गए. टिकट लेकर अंदर आ गये. जय मुझे एक घनी झाडी में ले गया. उसने मेरी सलवार निकाल दी. मैं शादी से पहले सलवार सूट ही पहनती थी. फिर जय ने मेरा सूट भी निकाल दिया. दोस्तों, वो बड़ा डेरिंग वाला लड़का था. फिर मेरा मंगेतर जय मेरे मस्त मस्त मम्मे पीने लगा. मैं भी शादी से पहले खूब छिनालपन दिखाया. मजे ले लेकर मंगेतर को मम्मे पिलाने लगी. जय हाथ से जोर जोर से मेरे कबूतर दबाने लगा. मुझे बहुत मजा आया. फिर एक बार फिर से वो मेरी चूत पर पहुच गया. और मेरी चूत पीने लगा. मैं जन्नत के मजे चिड़िया घर में ही लेने लगी. जय अच्छे से जीभ चला चला कर मेरी गुलाबी चूत पीने लगा. फिर वो नंगा हो गया. अपने मोटे लौड़े को उसने मेरी चूत पर रख दिया और लौड़े के सुपाड़े से मेरी चूत के ओंठ घिसने लगा. बड़ी देर तक जय यही इश्कबाजी करता रहा. पता नहीं कहाँ से हर बार वो नए नए काम मेरी चूत के साथ करता था. वो बड़ी देर तक अपने सुपाडे से मेरे भगंकुर [चूत के दाने]  को घिसता रहा. मैं तड़पती रही. बार बार अपनी कमर और गांड उठाती रही.

बड़ा तडपाया उस जालिम ने मुझे. फिर जय ने बड़े इंतजार के बाद अपना मजबूत लौडा मेरे भोसड़े में डाल दिया और निठल्ला मुझे चोदने लगा. मंगेतर के लौड़े के स्पर्श से मेरी चूत फूलकर कुप्पा हो गयी. मेरी चूत में गुब्बारे फूटने लगे. आतिशबाजी होने लगी. मंगेतर जोर जोर से कमर चला चलाकर मुझे चोदने लगा. मैं चुदने लगी. चुदवाने लगी. मजा मारने लगी. मंगेतर मेरी चूत में लौड़ा देने लगा. मुझे पेलने खाने लगा. चिड़िया घर में लोग टहल रहे थे. जानवर देख रहे थे. और मैं झाड़ी में चुदवा रही थी. दोस्तों, कुछ देर बाद तो जय इतनी जोर जोर से मुझे ठोकने लगा की उसका कोई जवाब नही था. मुझे चक्कर आने लगा, मेरा पूरा नंगा बदन कांपने लगा. मेरे कान में झुन झुनी होने लगी. जय बड़ी जोर जोर से मेरी चूत में लौड़ा देने लगा. मेरे पेट में जलन होने लगी. चूत में तो आग ही लगी हुई थी. फिर जय जोर जोर के अनगिनत धक्के मारता हुआ झड गया. घंटों हम दोनों झाड़ी में लिपटे रहे और एक दुसरे से चुम्मा चाटी करते रहे. दोस्तों, ३ महीने बाद मेरी जय से शादी हो गयी. पर उससे पहले ही मैं १०० १५० बार उससे चुदवा चुकी थी. मेरी चूत बिलकुल ढीली हो चुकी थी. 

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