चुदाई की कहानियाँ

बड़ी बहन का योनी भेदन

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हैल्लो दोस्तो मेरा नाम रॉकी है और में जबलपुर का रहने वाला हूँ.. मेरे घर में मेरे पिताजी, माताजी, मेरी बड़ी बहन गायत्री और में रहता हूँ. गायत्री और में बचपन से ही एक दूसरे के बहुत ही करीब है और हम दोनों में कभी भी सेक्स नहीं हुआ था लेकिन हम दोनों को एक दूसरे से चिपकना मस्ती करना बड़ा ही पसंद था और हम हमेशा ही अपने कॉलेज से घर पर आने के बाद साथ में ही रहते थे. आप ऐसा कह सकते है कि अलग नहाने और कॉलेज की क्लास टाईम के अलावा हम हमेशा करीब होते है. गायत्री को मेरे सारे राज़ पता है और मुझे उसके.. हमारा रिश्ता ऐसा था कि हमे कभी एक दूसरे के अलावा और किसी भी दोस्त की ज़रूरत ही नहीं पड़ी और हम हमेशा ही एक दूसरे के बहुत करीब थे. गायत्री मेरे साथ अधिकतर बिना बाह की कमीज़, सलवार में ही रहती थी और हम चिपककर बात करते रहते है और मुझे उससे चिपकना बहुत अच्छा लगता है. इससे उसके बदन की महक और उसकी सांसो की महक मुझे आती है और उसके कंघो से लेकर हाथ तक मुझे उसे छूना बहुत अच्छा लगता.

तो दोस्तों अब में उस किस्से पर आता हूँ.. जहाँ से हमारी ज़िंदगी ने बदलाव लिया और हमने जहाँ से शारीरिक सुख लेना शुरू किया. यह बात पिछले महीने की है और हमारे घर पर सिर्फ़ गायत्री और में ही था.. हमारे माता, पिता दोनों ही किसी शादी में दो दिन के लिए बाहर गये थे. गायत्री और मुझे कहीं भी किसी भी शादी में जाना पहले से ही पसंद नहीं था और हमे वहां पर कोई भी अच्छा नहीं लगता था तो गायत्री और मैंने घर पर ही रहने का फैसला लिया.. पहले हमने खाना खाया और फिर हम गेम खेलने बैठ गये.. गेम के बीच ही गायत्री मुझे बार बार छेड़ती जाती.. कभी मेरे हाथ पर चिकोटी देती तो कभी मेरे गालो को खींचती या फिर कभी मेरे कान पकड़ती तो मुझे भी अब कुछ देर बाद शरारत सूझने लगी और में गायत्री के पीछे चुपके से जाकर अपनी दोनों हाथ की उंगलियों से गायत्री के पेट पर दबाता और वो झट से उछलती और इस तरह हमारा एक दूसरे के साथ गुदगुदी करना शुरू हुआ.

हमने एक दूसरे को गुदगुदी करते करते एक दूसरे को अपनी बाहों में भरकर गुदगुदी करने लगे.. में गायत्री के बदन को पूरा उसके कपड़ो के ऊपर से पकड़कर महसूस कर रहा था और उसका बदन मेरे बदन से ऐसे चिपका हुआ था कि में उसके बदन की पूरी गरमी को एंजाय कर रहा था और हम दोनों अपनी ही मस्ती में खोते जा रहे थे.

फिर एक दूसरे की बाहों में मस्ती करते करते हम रूम में पहुंचकर बेड पर गिर पड़े और हम एक दूसरे के कपड़ो के अंदर हाथ डालकर गुदगुदी करने लगे और वो मेरी पेंट के अंदर हाथ डालकर मेरे लंड पर गुदगुदी करने लगी तो मुझे भी शरारत सूझी और मैंने उसका टॉप उसकी कमर से ऊपर चड़ा दिया और मैंने देखा कि गायत्री ने काली कलर की ब्रा पहनी हुई थी.. में गायत्री की नेवेल को फैलाकर गायत्री की नेवेल पर बीच में किस करने लगा तो गायत्री अब मेरे बालों के साथ खेलती जा रही थी और हम दोनों को इस खेल में बड़ा मज़ा आ रहा था और फिर मैंने गायत्री की सलवार पूरी उतार दिया था और अब गायत्री सिर्फ़ ब्रा और पजामे में बिस्तर पर लेटी थी तो मैंने उससे कहा कि क्यों ना मम्मी, पापा जो करते है.. वो हम भी करे और इस पर गायत्री ने पूछा कि वो लोग क्या करते है तो मैंने गायत्री को कहा कि जो में करता हूँ. तुम बस उसमे मेरा साथ देना.. तुम्हे बड़ा मज़ा आएगा.

फिर उसके लिए उसने खुशी से हाँ कर दी और अब मैंने गायत्री को आराम से लेटने के लिए कहा और उसके दोनों हाथों को फैला दिया और में गायत्री के कंधे को पकड़कर अपना पैर उसके फैले हुए पैरों के बीच में डालकर उसकी छाती और कंधो पर किस करने लगा और में बीच बीच में गायत्री के बदन को किस भी करता जा रहा था. फिर में गायत्री के होंठो पर भी किस करने लगा और मैंने गायत्री का थोड़ा मुहं खुलवाया और अपनी जीभ गायत्री के मुहं में डालकर गायत्री के मुहं को अंदर से चूस रहा था और मेरे ऐसा करने से हम दोनों को बड़ा मज़ा आ रहा था.

फिर मैंने अपना एक हाथ उसके पीछे ले जाकर उसकी ब्रा का हुक खोलकर धीरे धीरे से उसकी ब्रा भी उतार दी और में गायत्री के बूब्स को देखकर मदहोश होने लगा और धीरे धीरे बूब्स को दबाने लगा और में गायत्री के होंठ को किस भी करता जा रहा था.. में गायत्री की जीभ को अपने मुहं में सक करने लगा.. ऐसा जैसे में उसकी जीभ का रस पी रहा हूँ.

फिर धीरे धीरे अब गायत्री की साँसे तेज़ हो रही थी और वो मेरे किस का और मेरे हाथों के छूने का जवाब दे रही थी और में बीच बीच में गायत्री के गाल पर किस करता.. उसकी गर्दन पर किस करता और में उसे किस करते करते उसकी छाती तक आ गया तो में गायत्री के भूरे कलर के निप्पल को उंगलियों में लेकर दबाने लगा.. गायत्री के निप्पल बहुत कड़क थे और वो मेरी इस हरकत से मोन करने लगी थी और मैंने गायत्री के निप्पल को चूसना शुरू कर दिया और बारी बारी से उसके निप्पल को मुहं में लेकर चूसता तो गायत्री अपनी मस्ती में मस्त होकर मोन करती जा रही थी.. इससे मुझे और भी मज़ा आ रहा था और कोई भी घर में मौजूद नहीं था तो मुझे किसी बात का डर भी नहीं था और हम बेफ़िक्र होकर मस्ती कर रहे थे.

फिर मैंने अपने सारे कपड़े उतार दिए और गायत्री के ऊपर लेट गया और उसके ऊपर के बदन पर चुम्मा चाटी करता रहा और जगह जगह मैंने उसके बदन पर काटा भी जिससे वो आअहह उह्ह्ह की आवाज़ में चिल्लाती. फिर में अब थोड़ा नीचे जाकर उसका पैर चूमने लगा और उसकी नाभि में उंगली डालकर खेलने लगा और वो आराम से बिस्तर पर लेटकर मज़े लेती जा रही थी तो मैंने इसी दौरान उसके पजामे का नाड़ा ढीला कर दिया और धीरे से उसका पजामा और उसकी पेंटी को उतार कर उससे अलग कर दिया और अब हम दोनों ही बिस्तर पर नंगे लेटे हुए थे. फिर में नीचे गायत्री के पैरों के बीच में आ गया और में गायत्री की चूत पर हाथ घुमाने लगा.. दोस्तों गायत्री और मैंने कभी अपने अन्दर के हिस्सों से बाल साफ नहीं किए थे तो हमारे अंगो पर झांट उगे हुए थे लेकिन इसके बावजूद गायत्री की चूत मुझे आमंत्रित कर रही थी.. उसकी चूत पूरी तरह से गीली थी और उस में से महक आ रही थी और में गायत्री की चूत की झांटो को थोड़ा हटाकर उसकी चूत के गुलाबी हिस्से को चाटने लगा.. वहाँ पर एक छोटा दाना था.. तो में उसे उंगली से सहलाने लगा.. जिसकी वजह से गायत्री बहुत गरम होकर पैर मारने लगी. दोस्तों में एक और बात बता दूँ कि हमे सेक्स का ज्यादा अनुभव नहीं था. हम वही कर रहे थे.. जो हमे अच्छा लग रहा था.

फिर में गायत्री की चूत को थोड़ा फैलाकर उसकी चूत के अंदर भी चाटने की कोशिश कर रहा था और मेरी जीभ गायत्री की चूत की जड़ से भी टकराई और में चूत के दाने को अपने मुहं में लेकर बड़े मज़े से चूसने लगा लेकिन गायत्री तो अपनी ही दुनिया में मज़े में थी. वो पागलों की तरह मोन कर रही थी अह्ह्ह उह्ह्ह रॉकी तुम यह क्या कर रहे हो? सिसकियाँ लेती हुई चिल्लाती जा रही थी.

फिर में अब सीधा उसके ऊपर लेट गया और अपना एक हाथ नीचे ले जाकर अपने लंड को गायत्री की चूत के छेद पर सेट किया और में एक हाथ से अपने लंड को पकड़कर गायत्री की चूत पर दबाने लगा लेकिन उसकी चूत बहुत टाईट थी तो मेरा लंड इधर उधर हो रहा था तो में लंड को गायत्री के मुहं के पास लाया और अपना लंड उसके मुहं के पास ले जाकर मुहं में डाल दिया और उससे लंड को गीला करने को कहा तो गायत्री ने मेरा लंड झट से मुहं में ले लिया और वो उसे अपनी जीभ से चाटकर गीला कर रही थी और वो बड़े मज़े से मेरे लंड को चूस रही थी.

फिर मैंने जब अपना लंड उसके मुहं से बाहर निकाला तो गायत्री ने कहा कि मेरे लंड का स्वाद नमकीन है और उसे मेरे मोटे लंबे लंड को चाटकर बहुत मज़ा आया और फिर मैंने सही मौका देखकर अपना खड़ा हुआ कड़क लंड गायत्री की चूत पर रखा और मैंने अपने हाथ और शरीर का पूरा दम लगाकर एक ज़ोर का झटका दिया तो मेरा आधा लंड गायत्री की चूत को चीरता हुआ घुस गया और इसकी वजह से गायत्री ज़ोर से चीखने चिल्लाने लगी.. वो मेरे लंड को अपनी चूत में नहीं सह सकी.

फिर मैंने झट से गायत्री के मुहं पर अपना मुहं रख दिया और उसके होंठो को चूमने लगा और उसके बूब्स को सहलाने लगा.. गायत्री की चीख मेरे मुहं में समाए जा रही थी तो कुछ देर बाद जब वो थोड़ी शांत हुई तो मैंने ऐसा ही एक और दमदार झटका लगाकर अपना पूरा का पूरा लंड गायत्री की चूत में घुसा दिया लेकिन गायत्री के आँसू बाहर निकल रहे थे और वो मेरी पीठ पर मुक्का मारती जा रही थी. तो में अब अपना लंड उसकी चूत के अंदर ही घुसाए उसे हग कर रहा था और उसके बदन को सहला रहा था.. तभी थोड़ी देर के बाद गायत्री एकदम शांत हुई और मेरे हाथ फेरने से उसका बदन फिर से उत्तेजित हो गया.. में उसके नंगी पीठ पर हाथ फैरता, कभी उसकी कमर पर हाथ फैरता और बीच में प्यार से उसके बूब्स भी दबाता.. जिससे उसका दर्द मज़े में बदल गया और अब में उसकी चूत में अपने लंड को ज़ोर ज़ोर से धक्के देकर अंदर बाहर करने लगा लेकिन गायत्री की चूत बहुत टाईट थी.. जिसकी वजह से मुझे मेरे लंड पर उसकी चूत की रगड़ महसूस हो रही थी और मुझे ऐसा लग रहा था.. जैसे गायत्री की चूत मेरे लंड को चूस रही हो और में गायत्री की चूत को चोदता जा रहा था.

मैंने गायत्री को मजबूती से पकड़ रखा था और बार बार उसके होंठो को किस करता जा रहा था और उसके मुहं के अंदर चाट रहा था.. अपने बदन से उसका गरम जोश से भरा बदन रगड़ते हुए महसूस कर रहा था. फिर गायत्री भी गरम होकर मेरी पीठ पर अपने नाखून गड़ा रही थी.. जिससे मेरे बदन पर निशान भी हो गये लेकिन में फिर भी लगातार गायत्री की चूत में अपने लंड को लगातार अंदर बाहर करता जा रहा था.

फिर उसके कुछ देर बाद मैंने अपनी चुदाई की रफ़्तार बड़ा डाली और मुझे महसूस हुआ कि गायत्री का बदन अकड़ रहा था और वो ज़ोर ज़ोर से चिल्लाने लगी.. चिल्लाते ही उसने अपना पानी छोड़ दिया तो मुझे भी लगा जैसे में भी झड़ने वाला हूँ लेकिन में लगातार धक्के दिए जा रहा था और उसका पानी निकलने के तुरंत बाद ही मेरा बांध भी टूट गया और मेरा भी गरम गरम वीर्य निकलने लगा और मैंने गायत्री की चूत के अंदर ही अपना पानी छोड़ दिया और गायत्री की चूत में हम दोनों का पानी मिल गया. हम ज़ोर ज़ोर से साँसे ले रहे थे और हम दोनों का बदन पसीने से भीगा हुआ था.. मेरा लंड भी सिकुड़कर गायत्री की चूत के बाहर निकल गया. में सीधा होकर उसके पास में लेट गया.. थकावट के कारण हम एक दूसरे से बात भी नहीं कर पा रहे थे और हम वैसे ही नंगे एक दूसरे की बाहों में सो गये. उस टाईम हमे ग़ज़ब की नींद आई और जब हम उठे तो हमने देखा कि बेड शीट पर सूखा हुआ खून और वीर्य के निशान है तो हम बहुत डर गये और हम उठकर सीधे बाथरूम में नहाने चले गये.

फिर हम एक साथ में बाहर आए कपड़े पहने वो बेडशीट को लेकर मशीन में धोने डाल दिया और दवाई की दुकान से दर्द की दवाई लेकर मैंने गायत्री को दी और गर्भनिरोधक गोली लाकर दी.. जिससे गायत्री प्रेग्नेंट ना हो पाए. उसके बाद हमारे माता, पिता के आने तक हमने चुदाई का सिलसिला शुरू ही रखा और माता, पिता आने के बाद हम नॉर्मल व्यहवार करने लगे भाई बहन की तरह. पापा मम्मी के सोने के बाद रात में हमारी चुदाई का प्रोग्राम होता रहता है.. हमने चुदाई के हर तरीके को आजमाया और चुदाई का मज़ा लिया.

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