हैल्लो दोस्तों, में सीमा आज आप सभी चाहने वालों को अपना एक सच्चा पहला सेक्स अनुभव बताने जा रही हूँ, जिसमें मैंने अपने भाई के साथ वो मज़े लिए, जिसके लिए हर कोई अपनी हदे पार कर सकता है, चाहे वो समय कैसा भी रहा हो कुछ ऐसा ही मेरे साथ भी उस समय घटित हुआ जो आज में वही सब बताने जा रही हूँ कि कैसे मैंने अपनी चुदाई के मज़े लिए.

सबसे पहले में अपना परिचय आप सभी को करवा देती हूँ. दोस्तों मेरा नाम सीमा है, जब यह घटना मेरे साथ घटी उस समय मेरी उम्र 22 साल थी, मेरे फिगर का आकार 36-27-32 है और में दिखने में बहुत सुंदर मेरा रंग गोरा, मेरे सेक्सी बदन को देखकर हर लड़का मुझे पाने की इच्छा अपने मन में रखता था, बहुत सारे लड़के मेरी मटकती हुई गांड, उभरे हुए गोरे बूब्स को घूर घूरकर देखते थे, क्योंकि में हमेशा बड़े गले के कपड़े पहनती हूँ और मेरी उस जालीदार चुन्नी से मेरे गोरे गोरे बूब्स उनको साफ साफ नजर आते थे.

वैसे भी में दिखने में कुछ ज्यादा ही हॉट सेक्सी हूँ, इसलिए कॉलेज में क्या मेरे अड़ोस पड़ोस में भी हर कोई मुझे अपनी गंदी खा जाने वाली नजर से ही देखता. दोस्तों में एक बहुत अच्छे कॉलेज से अपनी बीए की पढ़ाई आखरी साल से कर रही हूँ और अभी में लुधियाना पंजाब में रहती हूँ और में वहीं पर ही अपने अंकल आंटी के घर पर रहकर अपनी पड़ाई कर रही हूँ, वो मुझे अपनी बेटी से भी ज्यादा प्यार करते है, वैसे उन अंकल के एक लड़का भी है, जो अंकल की दुकान को सम्भालता है और अपने पापा का दुकान के सभी छोटे बड़े कामों में हाथ बटाता.

दोस्तों अभी कुछ दिनों पहले ही मेरे भाई जिसका नाम रवि है, उसने घर पर नेट लगवाया है और जिस पर मुझे सेक्सी कहानियों का पता चला, इसलिए मैंने बहुत कम समय में बहुत सारी सेक्सी कहानियाँ पढ़ी है और उनके बहुत मज़े लिए और इसलिए में आज अपनी भी सच्ची कहानी आप सभी तक पहुंचा रही हूँ, जिसमें मैंने मेरे साथ कैसे कैसे क्या क्या किया वो सब कुछ विस्तार से लिखा है.

दोस्तों यह बात पिछले साल की बात है. उस समय मेरे पेपर के दिन थे, इसलिए में अपनी पढ़ाई पेपर की तैयारी कर रही थी और में जिस घर में रहती हूँ, उसमें बस हम चार लोग ही रहते है, में भैया और अंकल आंटी. फिर उस दिन अंकल, आंटी घर पर नहीं थे, वो लोग किसी रिश्तेदार की शादी में कहीं बाहर गये हुए थे, मेरे पेपर और भाई की दुकान की वजह से हम दोनों को घर पर छोड़कर वो लोग चले गए और मेरा भाई भी उस दिन दुकान से जल्दी घर वापस आ गया था और उस दिन उसके हाथ में एक फिल्म की सीडी थी, लेकिन में अपनी पढ़ाई कर रही थी, में अपने काम में बहुत व्यस्त थी, लेकिन अचानक से कुछ देर बाद जब मेरी नजर पड़ी.

तब मैंने उससे पूछा कि रवि यह कौन सी फिल्म की सीडी है? तब वो मेरे सवाल को सुनकर थोड़ा सा घबराकर मुझसे बोला कि यह तुम्हारे काम की नहीं है, तुम अभी छोटी हो और वो यह बात मुझसे कहकर जल्दी से अपने रूम में चला गया और फिर उन्होंने कंप्यूटर को चलाकर उस सीडी को उसमें डाल दिया और गलती से वो अपने कमरे को अंदर से बंद करना भूल गया और वो मेरे लिए बहुत अच्छा मौका था. मैंने उसका पूरा पूरा फायदा उठाया. दोस्तों अब मेरा दिल भी पढ़ाई में नहीं लग रहा था, क्योंकि में उसको देखने के लिए अंदर ही अंदर बहुत उत्सुक थी, इसलिए मैंने मन ही मन सोचा कि क्यों ना में भी जाकर देखूं कि वो कौन सी फिल्म की सीडी है, जिसको में नहीं देख सकती? इसलिए में चोरी-छिपे उस रूम के अंदर आकर पर्दे के पीछे छुपकर देखने लगी.

तब मुझे पता चला कि भाई जो कंप्यूटर पर सीडी देख रहे थे, वो बिल्कुल नंगे लड़के लड़की की थी, उसमें वो दोनों लड़का लड़की सेक्स कर रहे थे. पहले वो लड़का कुछ देर तक उस गोरी चिकनी लड़की के बूब्स को दबाता सहलाता रहा. उसके बाद उसने लड़की को नीचे लेटाकर उसकी चूत में ऊँगली करना शुरू किया और जब वो दोनों जोश में आ गये तो लड़के ने ज्यादा देर ना करते हुए तुरंत अपना लंड चूत में डालकर अपनी गांड को आगे पीछे करके जोरदार धक्के देकर उसकी चुदाई करना शुरू किया.

अब रवि फिल्म देखने के साथ अपने एक हाथ को अपनी पेंट की जीप को खोलकर अंदर डाले हुए था और वो अपने हाथ को लगातार लंड के ऊपर नीचे कर रहा था, वो सब देखकर में भी जोश में आने लगी और अब मेरा भी एक हाथ अपने बूब्स पर चला गया और दूसरा हाथ सलवार के अंदर चला गया और में अब अपने दोनों हाथों से अपनी चूत और बूब्स को सहला रही थी, जिसकी वजह से मुझे मेरे अंदर कुछ होता हुआ महसूस हो रहा था.

अब मेरे भाई के मुहं से जोश में आने की वजह से सिसकियाँ निकल रही थी, वो आह्ह्हह् उफ्फ्फ्फ़ कर रहा था और थोड़ी देर बाद उसने अपना हाथ खीँचकर पेंट से बाहर निकाल लिया, जिसकी वजह से उसके हाथ के साथ उसका लंड भी बाहर आ गया और उसके लंड की लम्बाई मोटाई को देखकर में बहुत हैरान और एकदम चकित हो गई, क्योंकि उसका लंड करीब 6 इंच लंबा होगा. मैंने यह सब अपनी आखों से पहली बार देखा था, इसलिए भी में बहुत चकित हुई और वो लंड तो उस फिल्म वाले लड़के के लंड से भी लंबा और मोटा था.

अब मेरा भी दिल उसको देखकर करने लगा कि इसी समय रवि मेरी चूत में अपना लंबा मोटा लंड डाल दे और उस फिल्म वाले लड़के की तरह मुझे भी ज़ोर ज़ोर से धक्के देकर मेरी चूत को शांत कर दे और अब वो सभी बातें सोचकर मेरे मुहं से भी ना चाहते हुए सिसकियाँ निकल गयी.

तभी भैया ने पीछे मुड़कर उस पर्दे की तरफ देख लिया, जिसके पीछे में छुपकर खड़ी हुई थी और अब में एकदम से डरकर चुपचाप खड़ी हो गई और मुझमें बोलने की बिल्कुल भी हिम्मत नहीं थी, में बहुत सहमी हुई थी. तभी वो मेरे पास आकर मुझसे पूछने लगे, क्यों सीमा तुम यहाँ क्या कर रही हो? और तुम अंदर कैसे आ गई, तुमने दरवाजा कैसे खोल लिया.

फिर मैंने बहुत दबी हुई सी आवाज से कहा कि भैया में कुछ लेने आई थी और जब मैंने तुम्हारे दरवाजे पर हाथ लगाया तो वो खुल गया, शायद तुम उसको ठीक तरह से बंद करना भूल गये थे और में भी उस फिल्म को देखने के लिए यहीं पर रुक गई, वैसे यह कौन सी फिल्म है? तो वो मुझसे कहने लगे कि तुम अब बाहर जाकर अपनी पढ़ाई करो और उस पर ध्यान दो, वो सब तुम्हारे लिए इस समय ठीक होगा और तुम्हारी उम्र अभी यह सब देखने की बिल्कुल भी नहीं है, क्योंकि तुम अभी इसको देखने के लिए थोड़ी छोटी हो, चलो अब जल्दी से बाहर निकलो.

तभी मुझे उसके मुहं से वो शब्द सुनकर बहुत गुस्सा आ गया और में मन ही मन सोचने लगी कि खुद तो ऐसी गंदी गंदी फिल्मे देख रहा है और मुझसे ऐसी बातें कहता है. फिर मैंने उससे कहा कि भैया अगर तुम मुझे भी वो फिल्म सीधे तरीके से नहीं देखने दोगे तो में अंकल, आंटी के घर पर आ जाने के बाद यह सब कुछ सच सच बता दूँगी और में उनसे कहूंगी कि यह आपके जाने के बाद क्या क्या करता है, उनको भी तो अपने बेटी की गंदी हरकतों के बारे में पता चले.

अब वो मेरी पूरी बात सुनकर बिल्कुल हक्काबक्का रह गया, उसके माथे पर चमकते हुए पसीने से मुझे साफ साफ पता चल चुका था कि अब यह तो क्या कोई ऊपर दूसरी दुनिया से भी आ जाए तो मुझे वो फिल्म देखने से नहीं रोक सकता और वो मुझसे बोला कि देखो सीमा प्लीज तुम मम्मी, पापा को इसके बारे में कुछ भी मत बताना और अगर तुम चाहती हो तो आओ मेरे पास बैठकर यह फिल्म देख लो, वो तुम्हारी मर्जी में तुमसे कुछ भी नहीं कहूँगा, लेकिन प्लीज तुम हम दोनों के अलावा यह बात कभी किसी तीसरे को मत बताना वर्ना इसमें हम दोनों की बहुत बदनामी होगी और तुम्हारी ज्यादा होगी.

अब भाई ने खुद ब खुद एकदम सीधा होकर मुझे अपने साथ लेकर कंप्यूटर कुर्सी पर बैठा लिया और उसने उस फिल्म को दोबारा शुरू कर दिया और अब हम दोनों मिलकर वो फिल्म देखने लगे, रवि ने अपना एक हाथ मेरी पीठ पर रखा हुआ था और वैसे में भी वैसे यही चाहती थी. फिर रवि ने कुछ देर बाद अपना हाथ नीचे सरकाकर मेरी कमर पर रख लिया और कुछ देर फिल्म देखते हुए अपने हाथ को ऊपर उठाते हुए वो मेरे बूब्स को छूने लगा और फिर थोड़ी देर बाद अपने दूसरे हाथ से उसने मेरे एक हाथ को पकड़कर अपने लंड पर रख दिया, जो कि उसने अब अपनी पेंट से बाहर निकाला हुआ था. मैंने भी जोश में आकर उसके लंड को दबा दिया और अपने हाथ से धीरे धीरे ऊपर नीचे करने लगी, जिसकी वजह से उसका लंड और भी ज्यादा टाईट हो गया और सीधा तनकर खड़ा हो गया. फिर भाई ने मुझसे पूछा सीमा जैसे फिल्म में वो लड़का लड़की कर रहे है, क्या तुम भी वैसा करके उसके मज़े लेना चाहती हो? वैसा करने में बहुत मज़ा आता है.

फिर मैंने पूछा कि भैया ऐसा करने से मज़ा आता है? तो तुम जल्दी से करो, में भी एक बार वैसे मज़े लेकर जरुर देखना चाहती हूँ कि वो अनुभव कैसा होता है और मेरे इतना कहते ही सुनील ने तुरंत मेरी कमीज़ और सलवार दोनों को उतारकर एक तरफ रख दिया.

दोस्तों अब मेरे गरम बदन पर सिर्फ़ काली कलर की पेंटी और काली कलर की ब्रा थी और मेरे 34 के गोल गोल बूब्स को ब्रा के अंदर से देखकर सुनील ने जोश में आकर दोनों बूब्स को अपने दोनों हाथो में ले लिया और एक जोरदार झटके से ब्रा को भी उतार दिया, जिसकी वजह से अब मेरे दोनों बूब्स एकदम नंगे हो गये थे और उसने दूसरे झटके से मेरी पेंटी को भी उतार दिया.

वो अब मेरे दोनों बूब्स को चूसने लगा, जिसकी वजह से मेरे पूरे शरीर में आग लगने लगी थी और में अंदर ही अंदर बहुत अजीब सा महसूस करने लगी, मुझे ऐसे लगा जैसे मेरा पूरा शरीर अब उस कामवासना की आग में जल रहा हो, में बिल्कुल पागल हो चुकी थी, इसलिए अब में भी उसका सर अपने बूब्स पर दबाने लगी थी, वो मेरे बूब्स को पूरे जोश में आकर चूसने लगा और उनको बारी बारी से निचोड़ने लगा था और कुछ देर चूसने के बाद बूब्स को छोड़कर अब भैया ने जल्दी से अपनी पेंट को उतार दिया और अपनी बनियान को भी उतार दिया, जिसकी वजह से अब हम दोनों एक दूसरे के सामने पूरे नंगे थे और उसका 6 इंच का लंड हल्के हल्के झटके देकर ऊपर नीचे हो रहा था, क्योंकि वो अब पूरे जोश में था और साथ साथ वो फिल्म भी चल रही थी, जिसमें लड़का, लड़की मस्ती में मस्त होकर अपने चुदाई के काम में लगे हुए थे.

फिर मेरे मुहं से अब सिसकियाँ बाहर निकलने लगी थी, में बहुत गरम होकर बिल्कुल पागल हो चुकी थी, इसलिए मैंने भैया को बोला कि प्लीज अब जल्दी से तुम मेरी चूत की खुजली मिटा दो, में अब और ज्यादा इंतजार नहीं कर सकती, आह्ह्ह्ह उफ्फ्फ्फ़ अब ज्यादा देर ना करो प्लीज तुम भी उस लड़के की तरह अपना लंड मेरी चूत में डालकर मुझे धक्के दो और मेरे जोश को ठंडा कर दो. फिर भैया ने मेरी बात को सुनकर तुरंत उस फिल्म को बंद कर दिया और वो मुझे अपनी गोद में उठाकर पीछे लगे बेड पर आ गया.

उसने मुझे बिल्कुल सीधा लेटा दिया और उसने 69 की पोज़िशन में आकर मेरे दोनों पैरों को खोल दिया और मेरी अब तक कुंवारी चूत की फांको को पूरा खोलकर चूसने लगा और अपनी जीभ से मेरी चूत के दाने को टटोलना शुरू किया, जिसकी वजह से मेरे मुहं से हल्की सी मोन करने की आवाज बाहर निकलने लगी और अब उसका लंबा लंड मेरे मुहं के पास था.

मैंने भी जोश में अपने होश खोकर सही मौका देखकर उसके लंड को अपने मुहं में डाल लिया, मुझे उसको चूसने में किसी लोलीपोप को चूसने जैसा मज़ा आ रहा था और जिंदगी में ऐसा मज़ा मुझे उस दिन पहली बार मिला था. मैंने कभी सोचा भी नहीं था कि में कभी किसी का लंड अपने मुहं में डालकर यह सब करूंगी और वो लड़का मेरा ही भाई होगा, ऐसा तो मैंने कभी नहीं सोचा था. अब रवि के मुहं से भी हल्की आवाज में सिसकियाँ निकल रही थी, मेरी चूत को चूसने के साथ साथ रवि अब मेरी चूत में अपनी उंगली भी कर रहा था, जिसकी वजह से मुझे इतना मज़ा मिल रहा था कि में वो सब किसी भी शब्दों में नहीं बता सकती, उस समय मुझे ऐसे लग रहा था कि अभी मेरी चूत से कुछ बाहर निकलने वाला है और में पूरे जोश में थी और उसकी वजह से में भी अब उसके लंड को ज़ोर ज़ोर से चूसने लगी, उसके लंड को में अपने मुहं में पूरा अंदर तक लेना चाहती थी, जिसकी वजह से मेरी आखों से आंसू तक बहने लगे थे.

मेरा दिल कर रहा था कि में ऐसे ही मज़े से स्वाद से लंड चूसती रहूँ. अब मेरी चूत से पानी निकलने लगा, जिसके बाद मुझे ऐसे लगा कि जैसे में आसमान में उड़ रही हूँ, में बिल्कुल बेजान एकदम निढाल होकर पड़ी रही और रवि भैया ने मेरी चूत से निकला वो सारा पानी अपने मुहं के अंदर चूस लिया और फिर भी वो अपनी जीभ से मेरी चूत को चाटने साफ करने लगे और में पड़ी रही.

अब मैंने भी कुछ देर बाद होश में आकर उसके लंड को ज़ोर ज़ोर से चूसना शुरू कर दिया. उसका लंड अब लोहे के सरिए की तरह एकदम टाईट होकर मोटा और लंबा हो गया था, लंड का टोपा पहले से ज्यादा मोटा हो गया था, आख़िर में रवि ने अपने लंड का पानी मेरे मुहं में ही निकाल दिया, पहले तो मुझे लंड के पानी का स्वाद बहुत अजीब सा लगा.

फिर मैंने मन ही मन सोचा कि अगर में बाहर थूक दूंगी तो रवि क्या सोचेंगे? क्योंकि उसने भी कुछ देर पहले मेरी चूत का पानी पिया था और चाट चाटकर चूत को साफ भी किया था, इसलिए मैंने उनके लंड का पानी अपने मुहं के अंदर भरकर पूरा पी लिया और अब मुझे बहुत मज़ा आ रहा था. फिर रवि ने एक दो बार धक्के मेरे मुहं के अंदर मारकर अपना लंड मेरे मुहं से बाहर निकाल लिया और थोड़ी देर बाद रवि ने अपने लंड को मेरे हाथ में दे दिया और में उनके मुरझाए हुए छोटे आकार के उस लंड को अपने हाथ में लेकर धीरे धीरे आगे पीछे करने लगी और कुछ देर बाद एक बार फिर से लंड को में अपने मुहं में डालकर चूसने लगी, जिसकी वजह से अब रवि भैया का लंड धीरे धीरे दोबारा टाईट होने लगा था.

करीब दो मिनट चूसने के बाद उसका लंड बहुत टाईट होकर ऊपर नीचे होने लगा, उसका आकार अब पहले जैसा हो गया था और मुझे चूसने में अब पहले जैसा मज़ा आने लगा था. फिर भैया ने मेरे कूल्हों के नीचे एक तकिया रख दिया और मेरे दोनों पैरों को इधर उधर करके मेरी चूत का मुहं खोल दिया, मेरी चूत को पूरी तरह से खोलकर उसको अपनी चुदाई के लिए आमंत्रित करने लगी, चूत का हल्के गुलाबी रंग का दाना उसके लंड को अपनी तरफ आकर्षित करने लगा और वो अपनी ऊँगली से चूत की गहराई उसकी गरमी का मज़े लेने लगा और में नीचे पड़ी तड़पती रही और लंड का अपनी चूत में जाने का इंतजार करती रही.

अब वो कुछ देर चूत को बहुत प्यार से देखता रहा और फिर मेरे दोनों पैर को उठाकर अपने कंधे पर रखकर उसने अपने लंड को मेरी चूत के मुहं पर सेट किया, मेरी चूत को अपने लंड के टोपे से कुछ देर सहलाया, दाने को रगड़ा और अब उसके लंड का सुपाड़ा मेरी चूत का मुहं खोलकर धीरे धीरे फिसलकर अंदर जाने लगा. तभी उसने मेरे दोनों बूब्स को अपने दोनों हाथों से कसकर पकड़ लिया और सही मौका देखकर एक ही जोरदार धक्के में अपना लंड मेरी चूत में आधा अंदर तक डाल दिया, जिसकी वजह से मेरे मुहं से एक बहुत लंबी ज़ोर की चीख निकल गई, आईईईई में मर गई उफ्फ्फ्फ़ आह्ह्ह्ह प्लीज मुझे बहुत दर्द हो रहा है और में उस दर्द से एकदम तड़प उठी, वो दर्द मेरे बर्दाश्त करने से बिल्कुल बाहर था, लेकिन में फिर भी थोड़ा सा चीखकर चिल्लाकर शांत होने की कोशिश करने लगी. अब रवि भैया ने मुझसे कहा कि यह सब पहली बार में होना स्वभाविक है, तुम्हें कुछ देर बाद वो मज़े मिलने शुरू हो जाएगे, जिसके लिए तुम यह सब कुछ मेरे साथ कर रही हो, लेकिन उसके लिए तुम्हें यह दर्द सहना बहुत जरूरी है.

दोस्तों उसने मुझसे यह सब बातें कही और में चुपचाप सुनती रही और उस मज़े की उम्मीद करने लगी, जो मुझे कुछ देर बाद मिल ही गया, वैसे मैंने मन ही मन सोच लिया था कि जो भी होगा देखा जाएगा, आज मुझे वो मज़ा लेकर ही देखना है, जिसके पीछे पूरी दुनिया दीवानी हो जाती है, अपनी सारी हदे पार कर देती है. अब रवि ने कुछ देर रुककर एक बार फिर से एक ज़ोर के झटके के साथ अपना पूरा लंड मेरी चूत के अंदर तक डाल दिया और वो लंड मेरी चूत की दीवारों को चीरता हुआ अंदर जा पहुंचा और अब उसका पूरा लंड अंदर तक मेरी चूत में मुझे महसूस हो रहा था. मुझे ऐसे लग रहा था कि जैसे किसी ने कोई गरम गरम लोहे का सरिया मेरी चूत में डाल दिया हो.

अब रवि मेरे बूब्स को अपने दोनों हाथ से ज़ोर ज़ोर से दबा रहा था, उसने मेरे रसीले गुलाब जैसे होंठो को अपने होंठों से दबा लिया और चूसने लगा, जिसकी वजह से मेरी आवाज अंदर ही दबकर रह गई, लेकिन मुझे भी अब बहुत मज़ा आने लगा था और रवि ने अब अपनी तरफ से लंड को मेरी चूत में बहुत ज़ोर ज़ोर से धक्के मारने शुरू कर दिए थे और अब उसका लंड मेरी चूत में अंदर तक मेरी बच्चेदानी तक आ जा रहा था, पूरे रूम में छप छप गुप गुप की आवाज़ें आ रही थी, में भी अब नीचे से अपने चूतड़ को ऊपर की तरफ करके उसका पूरा पूरा साथ दे रही थी, जिसकी वजह से रवि का पूरा लंड मेरी चूत में जड़ तक जा सके और में चाहती थी कि सारी उम्र ऐसे ही रवि मुझे ऐसे ही चोदता रहे और मेरी चूत की प्यास बुझाता रहे, मेरी आग को शांत करता रहे और फिर आख़िरकार कुछ देर धक्के देने के बाद अब मेरी चूत ने अपना पानी छोड़ दिया, जिसकी वजह से अब रवि का लंड बहुत आसानी से मेरी चूत में फिसलता हुआ अंदर बाहर हो रहा था और वो लगातार धक्के मारता रहा.

अब हम दोनों को बहुत मज़े आ रहे थे. करीब 7-8 मिनट के बाद रवि ने लंड को चूत में पूरा अंदर तक डालकर अपनी तरफ से एक आखरी ज़ोरदार धक्का मार दिया और फिर उसने अपने लंड को तुरंत चूत से बाहर निकालकर अपने लंड से निकला गरम गरम वीर्य मेरे बूब्स पर निकालकर अपने लंड से मसल दिया. मैंने जैसा फिल्म में देखा था बिल्कुल मेरे साथ वैसा ही रवि भैया ने किया. में अपने बदन पर उनके लंड से निकले गरम गरम लावे को देख और बहुत अच्छी तरह से महसूस भी कर सकती थी, वो बहुत गरम चिपचिपा सा था, उससे बहुत अजीब सी बदबू आ रही, लेकिन दोस्तों वो जो भी जैसा भी था, मुझे तो बस अपनी पहली चुदाई के उस सुख से मतलब था और में मन ही मन बहुत अच्छा महसूस कर रही थी.

मेरे अंदर आज एक लड़की होने का एक अलग सा सुख था, में अपनी चूत को उससे चुदवाकर आज पूरी हो चुकी थी, वो सुख, वो मज़ा मुझे आज मिल चुका था, जिसके लिए हर एक लड़की अपनी सभी हदे पार करने के लिए तैयार हो जाए, वो आज मुझे मिल चुका था, जिसके लिए मैंने बहुत समय इंतजार किया और उसकी दिन में बहुत खुश थी, क्योंकि मेरी चूत की सील आज टूट चुकी थी, वो भी अपने ही घर में बिना किसी डर किसी संकोच के, लेकिन अब मैंने अपनी चूत में हल्की सी जलन भी महसूस की और अपने एक हाथ को नीचे ले जाकर छूकर देखा तो मेरी चूत से निकले खून के कुछ निशान मेरी उस ऊँगली पर थे, लेकिन में फिर भी नहीं डरी, क्योंकि उस चुदाई से मुझे पूरी तरह संतुष्टि मिल चुकी थी. दोस्तों बस अब और क्या सुनाऊँ? क्योंकि उसके बाद हमारी चुदाई का वो सिलसिला पहली चुदाई के बाद मानो शुरू हो चुका था, हमने बहुत बार सही मौका पाकर चुदाई के मज़े लिए.

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