एक दुसरे की बहन के साथ ग्रुप चुदाई

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हैल्लो दोस्तों, मेरा नाम योगेश है और जो में आज आप लोगों को बताने जा रहा हूँ वो मेरी लाईफ की एक सच्ची घटना है। दोस्तों मैं इस साईट का रेगुलर रीडर हूँ ये रोजाना मेरी रात को खास बना देती है मुझे इस पर भाई बहन की सेक्स कहानियाँ बहुत पसंद है। दोस्तों अब में अपनी कहानी पर आता हूँ, यह कहानी भाई बहन के ग्रुप सेक्स की है और इसमें बहुत सारे लोग शामिल है जिनका परिचय में कहानी के साथ ही करवाता रहूँगा और सबसे पहले में अपनी बड़ी बहन का परिचय दे दूँ। दोस्तों मेरी दीदी का नाम माधुरी है वो अपनी पढ़ाई मुंबई के एक कॉलेज में कर रही है और मेरे पापा और मम्मी हमारी एक कम्पनी को सम्भालते है इसलिए वो अधिकतर समय बाहर ही रहते है और इसलिए घर पर सिर्फ़ में और मेरी बहन ही रहते है। मेरी बहन बहुत ही सुंदर है और उसका फिगर तो एकदम कमाल है 36- 28- 38। दोस्तों भगवान ने मेरी दीदी को हर एक चीज़ एकदम अच्छी दी है उसके बूब्स, उसकी कमर, उसकी गांड, उसकी जांघे, उसका चेहरा, उसके बाल, उसकी हाइट, उसकी आवाज़ हर एक चीज़ अच्छी है।

मेरी दीदी का जिस्म ऐसा है कि उसको देखकर इंसान तो क्या जानवरों के भी लंड खड़े हो जाए, मेरी दीदी में सिर्फ़ एक ही कमी है उसका नखरा और उसमे नखरा बहुत ज्यादा है जिसकी वजह से दीदी का कोई भी बॉयफ्रेंड नहीं है और ना ही ज़्यादा दोस्त है। दोस्तों इस कहानी का एक और किरदार है जो मेरी ही बिल्डिंग में रहता है, उससे मेरी बहुत अच्छी दोस्ती हो गई और उसका नाम सुरेन्द्र है। एक बार में और सुरेन्द्र बाहर खड़े हुए थे तो एक बहुत ही हॉट और सेक्सी लड़की आई तो मैंने सुरेन्द्र से कहा कि यार देख क्या मस्त आईटम जा रही है, फिर उसने देखा और फिर अपना मुहं दूसरी तरफ कर लिया, लेकिन में उसको ही देख रहा था और उसको बोल रहा था कि यार इसके क्या मस्त फिगर है? देख इसके तो बूब्स गांड सब कुछ बहुत मस्त है और इसके साथ सेक्स करने में कितना मजा आएगा? तभी मैंने देखा कि वो मेरी ही बिल्डिंग में घुस गई। अब में और भी खुश हो गया और मैंने सुरेन्द्र से पूछा कि यार क्या वो अपनी ही बिल्डिंग में रहती है? तो वो कुछ नहीं बोला और फिर कुछ देर बाद वो मुझसे बोला कि चल हम कहीं घूमकर आते है और फिर हम घूमने चले गये।

दूसरे दिन रविवार था उसने मुझे अपने घर पर बुलाया, में उसके घर पर गया और मैंने दरवाजा खटखटाया तो दरवाजा खुल गया तभी मैंने देखा कि ठीक मेरे सामने वही सेक्सी आईटम खड़ी हुई थी और में उसको देखकर बहुत चकित हो गया। में कुछ देर उसको घूरता रहा और फिर मैंने उससे कहा कि मुझे सुरेन्द्र से मिलना है तो उसने मुझसे कहा कि आप अंदर आ जाओ, सुरेन्द्र अपने रूम में है, में अभी उसे बुला देती हूँ या फिर आप खुद चले जाईए। अब मैंने उसको धन्यवाद बोला और में खुद सुरेन्द्र के रूम में चला गया और अंदर जाते ही उससे पूछने लगा कि यह यहाँ पर कैसे? तब वो मुझसे बोला कि यह मेरी दीदी है, में उसके मुहं से यह शब्द सुनकर बहुत डर गया और उससे बोला कि यार तू मुझे माफ़ कर दे, कल मैंने जो भी कहा उन सभी बातों के लिए प्लीज और अब उसके चेहरे पर स्माइल थी और वो मुझसे बोला कि नहीं यार तू मुझसे माफ़ी क्यों मांग रहा है मेरी दीदी है ही इतनी सेक्सी कि कोई भी ऐसा बोलेगा।

दोस्तों पहले तो में समझ नहीं पाया, लेकिन फिर कुछ देर बाद में समझ गया कि यह भी मेरी तरह अपनी बहन से बहुत प्यार करता है, अब मैंने उससे कहा कि हाँ यार यह बात तो तू एकदम सही कह रहा है, तेरी बहन एकदम जबरदस्त माल है और जिसके साथ एक बार सो जाए उसकी तो किस्मत ही बदल जाएगी। तभी वो बोला कि हाँ यार और तेरी भी बहन कोई कम नहीं है, वो तो सबकी पहली पसंद है और मैंने कई बार यहाँ के लड़को को तेरी बहन के बारे में बातें करते हुए सुना है। फिर मैंने उससे पूछा कि तूने क्या सुना है? वो बोला कि यही कि तेरी बहन मस्त माल है और तेरी बहन के सामने दुनिया की सारी हिरोईने भी बेकार है और तेरी बहन के बारे में जब भी वो लोग बात करते है तो वो अपना लंड भी रगड़ते है।

दोस्तों मुझे पता नहीं क्यों उसकी बातें सुनकर अजीब सा लग रहा था, लेकिन बिल्कुल भी बुरा नहीं लग रहा था और में उसकी बातें सुनकर बहुत ही खुश हो रहा था। फिर मैंने कहा कि हाँ यार यह तो है मेरी दीदी बहुत ही सेक्सी और सुंदर भी है और अब हम दोनों एक दूसरे की बहनों के बारे में बातें करते रहे जिसकी वजह से अब हमारे लंड खड़े हो गये और हम दोनों को बहुत मजा आ रहा था।

दोस्तों ऐसे ही मेरे 6 और दोस्त बन गए जो अपनी सेक्सी हॉट और सुंदर बहन को चोदना चाहते थे या कह लीजिए कि अपनी बहन को चोदने के लिए इच्छा रखते थे। हम सब मिलते थे और एक दूसरे की बहन के नाम की मुठ मारते थे और एक दूसरे से उनकी बहनों के बारे में पूछते थे क्योंकि ऐसा करने में हम सभी को बहुत मजा आता था। फिर हम सब और भी खुल गये और अपनी अपनी बहनों की ब्रा, पेंटी भी लेकर आने लगे और एक दूसरे की बहनों की ब्रा, पेंटी लेकर उसको अपने लंड पर रगड़ते कभी पहनते भी और गंदे गंदे शब्द बोलते थे, ऐसा करते करते एक महीना निकल गया और फिर मेरे एक दोस्त ने मुझसे कहा कि काश सोचने की जगह सच में हमारी बहनें हमसे चुदाई करवाती। फिर मैंने कहा कि दोस्तों हम अपनी खुद की बहनों को पटा नहीं सकते क्योंकि हमें अपने घरवालों का डर लगता है, लेकिन हम एक दूसरे की बहनों को तो जरुर पटा सकते है, तुम खुद सोचो कि हमारी बहनें बाहर कभी किसी और से चुदवाएगी तो इससे अच्छा है कि हमारी बहनें हमारे ही किसी दोस्त से चुदवा ले और इससे हमको पता भी रहेगा कि हमारी बहनें कहाँ और किससे चुदवा रही है?

दोस्तों सभी को मेरा यह विचार बहुत पसंद आया और सभी ने कहा कि हम अपनी बहन को पटवाने में मदद भी कर देंगे और इस काम के लिए हम सब सुरेन्द्री हो गये और हमने एक दूसरे की बहन को पटाकर चोदने के लिए चुन लिया था। फिर मैंने सुरेन्द्र की बहन को चुना और योगेश ने मेरी दीदी को और ऐसे ही सबने पसंद कर लिया था, तभी मैंने योगेश से कहा कि तू अभी मेरे घर पर चल में तुझे अपनी दीदी से मिलवा देता हूँ, वो बोला कि ठीक है और हमने कपड़े पहन लिए और अपने काम पर लग गए और मैंने योगेश का परिचय अपनी दीदी से करवा दिया। दीदी ने उसको हैल्लो बोला, हाथ मिलाया और थोड़ी बातें भी की और बोली कि मुझे माफ़ करना, मुझे इस समय कहीं जाना है और फिर वो चली गई। दोस्तों मेरी दीदी के भाव बहुत है और हो भी क्यों नहीं, वो इतनी सुंदर जो है? तो मैंने योगेश से कहा कि यार मेरी दीदी का जिस्म चाहिए तो तुझे मेहनत तो बहुत करनी होगी। तभी मेरे पास सुरेन्द्र का कॉल आया और वो मुझसे बोला कि मेरे घर पर आ जा, में तेरा परिचय अपनी दीदी से करा दूँ और में उसके घर पर चला गया और उसने मेरा परिचय अपनी दीदी से करवा दिया और मैंने थोड़ी देर उसकी दीदी से बात की और अपने घर पर आ गया। फिर सुरेन्द्र का मेरे पास कॉल आया और वो मुझसे बोला कि मेरी दीदी सुबह 8 बजे अपने कॉलेज के लिए निकलती है तो तू अपनी बाइक पर उसको छोड़ देना। दोस्तों आप ये कहानी न्यू हिंदी सेक्स कहानी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है।

दोस्तों उसके मुहं से यह बात सुनते ही मेरा लंड एकदम टाइट हो गया और मैंने उससे कहा कि ठीक है कल सुबह तेरी बहन मेरी बाइक पर होगी और फिर मैंने योगेश को कॉल करके बोला कि मेरी बहन 9 बजे अपने कॉलेज जाती है तू कल जाकर उसको लिफ्ट दे देना, वो भी बहुत खुश हो गया और दूसरे दिन में सुबह 7.30 बजे ही तैयार होकर उसका इंतजार करने लगा और वो ठीक 8 बजे आ गई। फिर मैंने उसको हाए बोला और उसको मेरे साथ बैठने को कहा तो उसने पहले मना किया, लेकिन फिर मान गई और ऐसे ही हर दिन में उसको लिफ्ट देने लगा और हम अच्छे दोस्त हो गये और एक हफ्ते में ही बहुत खुलकर बातें करने लगे और फिर मैंने उसको एक दिन फिल्म देखने जाने को बोला और वो मान गई और वो उस दिन अपने कॉलेज से बंक कर गई।

फिर हम फिल्म देखने चले गये और एकदम आखरी वाली सीट पर जा बैठे जब फिल्म में रोमेंटिक सीन आया तो मैंने धीरे से उसके कंधे पर हाथ रख दिया। उसने मेरी तरफ देखा और एक सेक्सी सी स्माइल दी जिसकी वजह से मेरी हिम्मत और बढ़ गई और अब में अपने एक हाथ से उसके कंधे को सहलाने लगा, लेकिन वो कुछ नहीं बोली और फिल्म देखती रही और अब में उसकी गर्दन को सहलाने लगा और फिर मैंने उसके बूब्स को सहलाया और वो हल्का सा कसमसाई, लेकिन फिर भी कुछ नहीं बोली तो मेरी हिम्मत और ज़्यादा हो गई और में उसके बूब्स उसकी टी-शर्ट के ऊपर से दबाने लगा। फिर हम स्मूच करने लगे और फिल्म से उठकर बाहर चले आए और अपने घर पर ले जाकर मैंने उसको बहुत जमकर चोदा। ऐसे ही धीरे धीरे हम सभी दोस्त एक दूसरे की बहनों को अब चोदने लगे और फिर उनके ही भाईयों को उनकी बहनों की चुदाई की सारी बातें बताते हुए हमे बहुत ही मजा आता, लेकिन अब तक मेरी बहन को कोई भी नहीं पटा पा रहा था इस बात का मुझे बहुत दुख था। इसलिए हम सभी ने मिलकर एक प्लान बनाया और जब मेरे दोस्त के मम्मी, पापा बाहर गये तो उसका मेरे पास फोन आया और उसने कहा कि मेरी बहन घर में अकेली है।

फिर में उससे बोला कि तू टेंशन मत ले उसका खुद मेरे पास फोन आएगा और ऐसा ही हुआ। उसने फोन करके मुझे उसके घर पर आने को बोला और में फटाफट उसके घर पर चला गया और फिर हम दोनों चिपक गये और मैंने उसको और उसने मुझे नंगा कर दिया और तभी मैंने अपने दोस्त को एक मैसेज कर दिया और वो उसके पास वाली दूसरी चाबी से दरवाजा खोलकर अंदर आ गया और दरवाजे के पीछे से सब देखने लगा और जब मैंने उसकी तरफ देखा तो उसने मुझे स्माइल दी और मैंने उसकी बहन को अपने से ज़ोर से चिपका लिया। फिर कुछ देर बाद उसने मेरा लंड चूसा और फिर मैंने उसको सीधा लेटा दिया और अब में उसकी चूत को चाटने लगा। तभी मैंने उसको इशारा किया तो वो रूम में आ गया और आकर गुस्से से चिल्लाने लगा कि यह क्या हो रहा है?

उसकी बहन अचानक से उसे वहां पर देखकर बहुत डर गई और में भी डरने का नाटक करने लगा और उससे सॉरी बोलने लगा तो वो हम दोनों को धमकी देने लगा और में वैसा ही नंगा उसको सॉरी बोलने लगा और उसकी बहन मेरे पीछे आकर अपना नंगा जिस्म छुपाने लगी तो मेरे दोस्त ने बोला कि अब में मम्मी पापा को तुम दोनों की सारी बात बताऊंगा, फिर मैंने उससे कहा कि यार उससे तुमको कोई फायदा नहीं होगा और ठंडे दिमाग़ से सोचो और अगर तुम किसी को यह बात ना बताओ तब तुम्हारा फायदा जरुर हो सकता है। फिर वो बोला कि वो कैसे? तो मैंने उससे कहा कि तुम भी हमारे साथ मिलकर इसके मज़े कर सकते हो और ठंडे दिमाग से सोचो कि यह तो सबकी जरूरत होती है। फिर उसने कहा कि नहीं यह मेरी बहन है और में ऐसा कभी नहीं कर सकता। फिर मैंने उससे कहा कि हाँ मगर यह एक लड़की भी है और अगर तुम और में इसके साथ यह सब नहीं करेंगे तो कोई और बाहर वाला करेगा और इससे अच्छा यह है कि हम इसको खुश कर दे और मैंने अपने दोस्त का हाथ पकड़कर उसकी बहन के बूब्स पर रख दिया और अब उसकी बहन को कुछ भी समझ नहीं आ रहा था कि वो क्या करे क्योंकि अगर उसने मना किया तो उसका भाई घर में मम्मी पापा को सब कुछ बता देगा और वो मेरी तरफ देखने लगी।

फिर मैंने उसकी तरफ आंख मारकर कहा कि जो चल रहा है चलने दो तब उसने शरम से अपना सर झुका लिया और उसका भाई उसके बूब्स के साथ खेलने लगा। फिर उसने अपने सारे कपड़े उतार दिए और अपना लंड अपनी बहन को पकड़ाकर कहा कि आज से तुम दो दो लंड की मालकिन हो और उसकी बहन उसके लंड को हिलाने लगी, फिर मैंने भी अपना लंड उसकी बहन को हाथ में थमा दिया और बोला कि अब एक दूसरे से शरमाने से क्या फायदा, अब सब लोग एक दूसरे से खुल जाओ और फिर हमने बहुत मजे लिए और उसकी बहन अब पूरी तरह से खुल गई थी और ऐसे ही मेरे सभी दोस्त अपनी अपनी बहनों को भी चोदने लगे थे बस एक मुझे छोड़कर, क्योंकि में अब तक अपनी बहन को छू भी नहीं सका।

फिर एक दिन हम सभी ने निर्णय लिया कि हम सब मिलकर एक साथ एक दूसरे की बहनों के साथ सेक्स करेंगे, लेकिन अब सबसे बड़ी समस्या यह थी कि हम अपनी बहनों को इसके लिए तैयार कैसे करे? तो हमने इसके लिए विचार किया और हमने हमारे एक दोस्त के जन्मदिन का बहाना बनाया और गोआ जाने को कहा। दोस्तों आप ये कहानी न्यू हिंदी सेक्स कहानी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है।

फिर हम सब की बहनें यह बात सुनकर तुरंत मान गई, लेकिन मेरी बहन ने मुझसे साफ मना कर दिया और दोस्तों गोआ में मेरा एक बहुत बड़ा फार्म हाउस है इसलिए हमने वहां पर जाने का प्लान बनाया था और हमारी बहनों को हमने वहां पर फ्लाइट से भेज दिया और हम कार से चल पड़े तो भगवान की क्रपा से एकदम आखरी समय मेरी दीदी ने भी हमारे साथ चलने को कहा और दीदी कार में आगे आकर बैठ गई और बाकी दोस्त पीछे और में गाड़ी चला रहा था। फिर थोड़ी दूर जाकर में पीछे चला गया और मेरा एक दोस्त गाड़ी चलाने लगा। तब मैंने अपनी दीदी से कहा कि अगर आपको नींद आ रही हो तो पीछे आ जाए तो दीदी मान गई और मैंने दीदी को बीच में बैठा लिया। दीदी के एक तरफ में था और दूसरी तरफ़ मेरा एक दोस्त और तीन लोगों की जगह हम चार लोग बैठे हुए थे जिसकी वजह से हम सभी एक दूसरे से चिपके हुए थे और दीदी ने अपना सर मेरे कंधे पर रख दिया और सो गई।

अब मैंने अपना हाथ इस तरह से रख रखा था कि मेरी दीदी का एक बूब्स मेरी हथेली में था और में उसको धीरे धीरे सहलाने लगा और यह सब मेरे सारे दोस्त देख रहे थे और उन सभी के लंड टाईट हो गये थे और मेरा भी लंड फुल टाईट हो गया था। में पूरे रास्ते दीदी के बूब्स के साथ खेलता रहा और दीदी सोती रही। फिर हम गोआ पहुंच गये और हम फार्म हाउस में चले गये और सभी लड़कियाँ एक दूसरे से बातें करने लगी और हम सब ग्रुप सेक्स का प्लान बनाने लगे। तब मैंने देखा कि मेरी दीदी बाथरूम में नहाने गई है तो मैंने सबसे कहा कि हम अपनी अपनी बहनों को सब सच सच बता देते है और उनसे आग्रह करते है कि वो ग्रुप सेक्स को मान जाए और फिर हमने सभी को मना लिया और हमारे साथ साथ वो लोग भी बहुत व्याकुल हो गई और मैंने उनको यह भी बता दिया कि मेरी दीदी को इसके बारे में कुछ भी पता नहीं है। फिर हमने विचार किया कि रात को मेरी दीदी के सोने के बाद हम लोग ग्रुप सेक्स करेंगे और मेरा फार्म हाउस बहुत बड़ा था तो सभी अपनी अपनी बहनों के साथ एक एक रूम में सो गये।

में और मेरी दीदी भी एक ही रूम में और एक बेड पर सोए थे, लेकिन मेरी कुछ करने की हिम्मत नहीं हो रही थी। तभी मेरे दोस्त ने धीरे से मुझे इशारा दिया और में चुपचाप उठकर अपने रूम के बाहर आ गया और एक बड़े वाले रूम में गया तो वहां पर मैंने देखा कि मेरे सभी दोस्त और उनकी बहनें एक दूसरे के साथ लगे हुए थे। मैंने पहली बार ऐसा नज़ारा देखा था और हम सभी ने रात भर बहुत जमकर मजे किए। फिर में देर रात को अपने कपड़े पहनकर दोबारा अपने कमरे में दीदी के पास में आकर लेट गया और हम लोग दूसरे दिन दो उठे क्योंकि रात भर तो हम एक दूसरे की बहनों को चोद रहे थे। फिर हमने खाना खाया और रात होने का इंतजार करने लगे और फिर रात हो गई तो सबने फटाफट खाना खाया और दीदी के सोने का इंतजार करने लगे। में और दीदी एक ही बेड पर लेटे हुए थे। फिर थोड़ी देर में मेरा दोस्त मुझे बुलाने आया और जैसे ही में उठा दीदी जाग गई और वो मुझसे बोली कि कहाँ जा रहे हो? तब मैंने कहा कि कहीं नहीं बस मुझे नींद नहीं आ रही है। फिर दीदी बोली कि क्यों क्या हुआ? में बोला कि मुझे पता नहीं। फिर दीदी उठी और उन्होंने मेरी छाती पर अपना सर रख दिया और वो बोली कि बताओ मुझे क्या समस्या है?

दोस्तों दीदी का एक बूब्स मेरे हाथ से दब रहा था और दूसरा मेरे पेट से में एकदम चुप रहा था, तभी दीदी मुझसे और भी कसकर चिपक गई और वो बोली कि बताओ शरमाओ मत, लेकिन में कुछ नहीं बोला और दीदी ने अपना एक पैर उठाकर मेरे लंड पर रख दिया। अब तो मुझे और भी मजा आने लगा। अब दीदी मुझसे कहने लगी कि मुझे कल रात का सब मालूम है कि तुम सभी ने रात भर क्या क्या किया? और में उनके मुहं से यह सभी बातें सुनकर बहुत डर गया, लेकिन दीदी मुझे स्माइल दे रही थी और अब वो मुझसे कहने लगी कि तुम मुझे वो सारी बातें बताओ वरना में तुम्हारा सारा प्लान खत्म कर दूँगी। फिर मैंने दीदी की धमकी को सुनकर उन्हें सारी बातें बता दी और अब दीदी भी गरम हो गई और वो मुझे स्मूच करने लगी मुझसे कसकर चिपक गई और उधर मेरे सारे दोस्त रूम के दरवाजे से छुपकर यह सब देख रहे थे और हमने करीब 5 मिनट तक स्मूच किया और में दीदी के बूब्स को दबाने लगा। धीरे धीरे मैंने दीदी को पूरा नंगा कर दिया और दीदी मेरा लंड देखकर दीदी बहुत खुश हुई और वो मुझसे बोली कि मैंने हमेशा ऐसे ही लंड से चुदवाने की बात सोची थी।

फिर दीदी मुझसे बहुत ज़ोर से चिपक गई जिसकी वजह से दीदी के बड़े बड़े बूब्स मेरी छाती से दबने लगे और में अपना लंड दीदी की टाइट और नाज़ुक चूत पर रगड़ने लगा, जिसकी वजह से दीदी और में पागलों की तरह एक दूसरे को चूम रहे थे, हमें ऐसा लग रहा था कि हम एक दूसरे में घुस जाना चाहते हो। तभी मेरे सभी दोस्त पूरे नंगे मेरे रूम में आ गये दीदी उन्हें देखकर बहुत शरमा गई तो मैंने दीदी से कहा कि शरमाने की जरूरत नहीं है, यह सब मेरे दोस्त है और यह भी अपनी अपनी सग़ी बहनों को चोदते है, लेकिन दीदी तब भी शरमा रही थी। फिर मैंने दीदी को अपने से चिपका लिया और अपने दोस्तों को बाहर जाने को कहा तो मैंने उसने कहा कि तुम लोग बाहर चलो, में दीदी को अपने साथ लेकर आता हूँ और मेरे सारे दोस्त बाहर चले गये। उसके बाद मैंने अपनी दीदी को समझाया और उनसे कहा कि हमे सबके साथ बहुत मजा आएगा और कोई भी आपके साथ जबरदस्ती नहीं करेगा, प्लीज एक बार सबके साथ कोशिश करो और बाहर सबके सामने पूरे नंगे सेक्स करने पर आपको बहुत मज़ा आएगा।

फिर मेरे बहुत समझाने पर दीदी मान गई और में दीदी को अपनी गोद में उठाकर सबके सामने ले आया। वहां पर मेरे सारे दोस्त और उनकी बहनें बिल्कुल नंगे एक दूसरे के साथ चिपके हुए थे और सब दीदी के नंगे जिस्म को आँखो से चूम रहे थे और उन्हें चोद रहे थे और दीदी शरमा रही थी। तभी मैंने उनसे कहा कि आप लोग एक एक करके आओ में आप सभी के साथ अपनी दीदी का एक बार फिर से परिचय करवाता हूँ। तो यह बात सुनकर मेरा एक दोस्त सबसे पहले आगे आ गया। में और दीदी सोफे पर बैठे हुए थे और मेरा वो दोस्त दीदी के सामने खड़ा हो गया और उसका खड़ा लंड मेरी दीदी के मुहं के ठीक सामने था।

फिर दीदी मेरे दोस्त का लंड इतने पास से देखकर और भी शरमा गई और मैंने उसका परिचय दीदी से करवाया तो दीदी ने उसको हैल्लो बोला तो मैंने उनसे कहा कि ऐसे नहीं आपको इसका लंड अपने हाथ में पकड़कर इसके लंड पर किस करना होगा, दीदी मेरी यह बात सुनकर शरमा गई और वो बोली कि नहीं यह मुझसे नहीं होगा। फिर मैंने कहा कि प्लीज एक बार आप कोशिश तो करो और मैंने दीदी का हाथ पकड़कर उसके लंड पर रख दिया। दीदी ने उसका लंड पकड़ लिया, लेकिन किस करने से मना कर दिया तो मैंने भी ज़्यादा कुछ नहीं कहा और फिर कहा कि ठीक है, लेकिन आपको सभी का लंड पकड़कर हैल्लो बोलना होगा। फिर दीदी मान गई और मैंने एक एक करके सभी का उनसे परिचय करवाया। मैंने और दीदी ने सभी के लंड को पकड़कर हैल्लो बोला और मेरे दोस्त ने दीदी के बूब्स दबाकर हैल्लो बोला और फिर मैंने उनकी बहनों के साथ परिचय करवाया और उन्होंने एक दूसरे को समूच किया और एक दूसरे के बूब्स भी दबाए और अब दीदी बहुत खुल गई थी और अब वो बिल्कुल भी नहीं शरमा रही थी।

फिर मैंने दीदी को स्मूच किया और दीदी के बूब्स चूसने लगा। दीदी भी बहुत गरम हो गई और में दीदी के नंगे जिस्म को में खा जाना चाहता था। अब दीदी भी मेरे सर को पकड़कर अपने बूब्स पर दबाने लगी। मैंने धीरे धीरे दीदी के पूरे जिस्म को चाट डाला और उसके बाद में दीदी के दोनों पैरों के बीच में आ गया और मैंने दीदी की चूत को सहलाया, सूंघा। वाह दोस्तों दीदी की चूत की क्या मस्त खुशबू थी, मेरा मन किया कि में दीदी की चूत को खा जाऊँ। फिर दीदी की चूत को जैसे ही मैंने किस किया और चाटा तो दीदी एकदम से मचल उठी और उन्होंने मेरे सर को ज़ोर से अपनी चूत पर दबा लिया और अपनी गांड को हवा में ज़ोर ज़ोर से उछालने लगी और उफ़फ्फ़ आह्ह्ह्ह एयेएहहहह मेरी जान, मेरे प्यारे भाई हाँ चूसो मेरी चूत को आहहहह यह बात बात सुनकर में और ज्यादा गरम हो गया और मैंने दीदी की चूत के छेद में अपनी जीभ को घुसा दिया और गोल गोल घुमाने लगा जिसकी वजह से दीदी और गरम हो गई और वो अपनी गांड को हवा में और ज़ोर ज़ोर से उछालने लगी और ज़ोर ज़ोर से सिसकियों की आवाज़े निकालने लगी।

फिर मैंने उनकी चूत को करीब 20 मिनट तक चाटा और फिर दीदी ने मेरे सर के बाल पकड़ लिए और मुझे अपनी तरफ खींचकर मुझसे चिपक गई और मुझे स्मूच करने लगी। अब दीदी पूरी नंगी थी और अब मैंने दीदी से मेरा लंड चूसने को कहा तो दीदी थोड़ा सोच में पड़ गई और थोड़ी देर बाद दीदी ने मेरे लंड को बड़े प्यार से पकड़ा और सहलाने लगी और फिर दीदी ने मुझे नीचे कर दिया और मुझे किस करने लगी। उसके बाद दीदी मुझे किस करते हुए मेरे लंड तक पहुंच गई और फिर दीदी ने बड़े प्यार से मेरे लंड पर किस किया और फिर दीदी मेरा लंड चूसने लगी। करीब 25 मिनट तक दीदी मेरा लंड चूसती रही। फिर मैंने दीदी को अपने ऊपर खींच लिया और स्मूच किया। अब में अपना लंड दीदी की चूत पर रगड़ने लगा, जिसकी वजह से दीदी भी जोश में आकर अपनी गांड को हवा में उछालने लगी और अब दीदी बहुत गरम हो गई और मुझसे आग्रह करने लगी कि प्लीज भैया अब डाल दो मेरी चूत में, अपनी दीदी को इतना मत तड़पा, में तुमसे आग्रह करती हूँ, प्लीज अब में लड़की से औरत बनना चाहती हूँ, अब अपनी बहन के जिस्म की भूख को ठंडा कर दो, तुम बहुत अच्छे हो भैया।

मैंने भी फिर देर नहीं की और दीदी की चूत में लंड को डाल दिया। दोस्तों अभी मेरा सुपाड़ा ही घुसा था कि दीदी ज़ोर ज़ोर से चिल्लाने लगी तो मैंने दीदी से कहा कि दीदी आप वर्जिन हो शुरू शुरू में आपको थोड़ा दर्द होगा, लेकिन फिर आपको बहुत मजा आएगा। दोस्तों आप ये कहानी न्यू हिंदी सेक्स कहानी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है।

फिर दीदी ने मेरे होंठ अपने होंठो में दबा लिये और ज़ोर ज़ोर से चूसने लगी। फिर जैसे ही में अपना लंड और अंदर डालता तो दीदी मेरे होंठो को और ज़ोर से चूसती और करीब तीन झटको के बाद जैसे ही मैंने आखरी झटका मारा तो मेरा लंड दीदी की तड़पती हुई चूत में पूरा समा गया और दीदी बहुत ज़ोर ज़ोर से चिल्लाने लगी, लेकिन उनकी आवाज़ मेरे मुहं में दब गई और वो उस दर्द से मचलने लगी थी। मेरे शरीर पर अपने नाख़ून से खरोंचने लगी और में थोड़ी देर ऐसे ही दीदी की चूत में अपना लंड डालकर दीदी की चूत का दर्द कम होने तक में उनके बूब्स को चूसने, दबाने लगा और फिर धीरे धीरे दीदी का दर्द कम होने लगा और अब दीदी अपने आप ही अपनी गांड को धीरे धीरे गोल गोल घुमाने लगी। फिर मैंने भी धीरे धीरे अपने लंड को अंदर बाहर करके दीदी की चुदाई करना शुरू कर दिया। अब दीदी को भी मजा आने लगा था और दीदी खुद की चुदाई करवाने में मेरा पूरा पूरा साथ देने लगी थी। दोस्तों मैंने दीदी को बहुत सारी पोज़िशन में चोदा, जिसमे दीदी ने भी मेरा पूरा पूरा साथ दिया और उन्होंने मेरे साथ अपनी चुदाई के बहुत जमकर मज़े लिए। फिर आखरी में मैंने अपना वीर्य दीदी की चूत में भर दिया और में थककर दीदी के ऊपर ही लेट गया और दीदी मेरे बालों को अपने हाथ से सहलाने लगी। मेरे सभी दोस्त हमे आसपास से घेरकर चुदाई के मज़े ले रहे थे और उन्होंने दीदी को बहुत बहुत बधाईयाँ दी और उनसे कहा कि आज वो लड़की से एक औरत बन गई। वो बहुत खुश थी और मेरी चुदाई से बहुत संतुष्ट भी थी। दोस्तों सबसे ज़्यादा मज़ा खुद की बहन को चोदने में ही आता है, इस बात का मुझे उस दिन एहसास हुआ क्योंकि मैंने अपनी बहन को पहली बार बहुत मज़े लेकर चोदा और हमें किसी भी बात की कोई टेंशन नहीं थी, बस हम दोनों के ऊपर चुदाई का भूत सवार था। मैंने उनके साथ मस्त होकर चुदाई के पूरे मज़े लिए और मैंने अपनी दीदी की चूत को चोदकर उनकी सील को तोड़ दिया। दोस्तों में उस अहसास को आप सभी को शब्दों में नहीं बता सकता कि उस पल में कैसा महसूस कर रहा था, जब मेरे मोटे लंड ने मेरी बहन की प्यासी वर्जिन चूत को चोदा ।।

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